मनोज जरांगे के 500 करोड़ रुपये वाले दावे पर विवाद, हुसैन दलवई ने मांगी जांच
महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण आंदोलनकारी मनोज जरांगे-पाटिल की ओर से जारी कथित ऑडियो क्लिप ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। क्लिप में दावा किया गया है कि भारतीय जनता पार्टी की ओर से मराठा आरक्षण आंदोलन को कमजोर करने के लिए 500 करोड़ रुपये दिए गए और यह रकम उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बेटे तथा शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे के माध्यम से पहुंचाई गई। कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। हालांकि, ऑडियो की प्रामाणिकता और उसमें सुनाई देने वाली आवाजों की पहचान की अभी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
यह विवाद उस समय शुरू हुआ, जब जरांगे ने बीड़ जिले में दशहरा रैली के दौरान 500 करोड़ रुपये से जुड़े आरोप लगाए। इसके बाद 22 अक्टूबर को जालना जिले में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग सुनाई। जरांगे का दावा है कि बातचीत में उनके मराठा आरक्षण आंदोलन और 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले उनके राजनीतिक प्रभाव को कमजोर करने की रणनीति पर चर्चा की गई है। उन्होंने आरोपों की जांच कराने की मांग भी की।
कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने कहा कि इतने गंभीर आरोपों की जांच जरूरी है और लगातार आरोप-प्रत्यारोप लगाने के बजाय तथ्यों को सामने लाया जाना चाहिए। इस मामले ने सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के सहयोगी दलों भाजपा और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के बीच भी तनाव बढ़ा दिया है।
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने 500 करोड़ रुपये के लेन-देन के आरोपों को खारिज किया है और जरांगे से अपने दावों के समर्थन में सबूत पेश करने को कहा है। शिवसेना नेताओं ने भी ऑडियो की सत्यता की जांच कराने की मांग की है। वहीं, भाजपा ने रिकॉर्डिंग की प्रामाणिकता, उसके सामने आने के समय और संभावित तकनीकी छेड़छाड़ की जांच की जरूरत बताई है।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 23 अक्टूबर को कथित ऑडियो क्लिप की फॉरेंसिक जांच कराने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि रिकॉर्डिंग की वास्तविकता, उसमें मौजूद आवाजों और क्लिप सामने आने के पीछे के कारणों की पड़ताल की जाएगी। शिवसेना नेताओं ने भी इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है।
फिलहाल 500 करोड़ रुपये के कथित लेन-देन का आरोप साबित नहीं हुआ है। मामले की दिशा ऑडियो की फॉरेंसिक जांच और सामने आने वाले साक्ष्यों पर निर्भर करेगी। जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि रिकॉर्डिंग वास्तविक है या उसमें किसी तरह की छेड़छाड़ की गई है और उसमें किए गए दावों की पुष्टि होती है या नहीं।
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