राजस्थान में जेन अल्फा के छात्र आंदोलन तेज, नौ जिलों में स्कूलों की बदहाली के खिलाफ प्रदर्शन
राजस्थान में सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं को लेकर छात्रों के विरोध-प्रदर्शन बढ़ते जा रहे हैं। पिछले एक महीने में राज्य के करीब नौ जिलों में विद्यार्थियों ने अलग-अलग समस्याओं को लेकर आंदोलन किया है। कहीं छात्रों ने स्कूल के मुख्य द्वार पर ताला लगाया, तो कहीं धरना देकर प्रशासन के सामने अपनी मांगें रखीं। कई जगह विद्यार्थी पैदल मार्च कर कलेक्ट्रेट तक भी पहुंचे।
शिक्षा विशेषज्ञ इन प्रदर्शनों को जेन अल्फा पीढ़ी के उभरते छात्र आंदोलन के तौर पर देख रहे हैं। बीकानेर, जयपुर, अलवर, भरतपुर, अजमेर, जालोर, बाड़मेर और बांसवाड़ा समेत कई जिलों में छात्रों के प्रदर्शन के बाद प्रशासन और शिक्षा विभाग को कार्रवाई करनी पड़ी है। इन आंदोलनों में बड़ी संख्या ग्रामीण और सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की है।
बीकानेर में 69 छात्राओं ने किया प्रदर्शन
बीकानेर के आवासीय सैनिक स्कूल का मामला हाल में सामने आया। यहां 69 छात्राओं ने रविवार को सामूहिक अवकाश लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया। छात्राओं का आरोप था कि स्कूल शुरू हुए करीब चार महीने बीतने के बावजूद उन्हें वर्दी नहीं मिली है। इसके अलावा शारीरिक और सैन्य प्रशिक्षण से जुड़ी सुविधाओं की कमी की बात भी कही गई।
स्कूल के प्रधानाचार्य अनिल शर्मा के अनुसार, सुविधाओं के विकास के लिए छह करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं और निर्माण व अन्य कार्य जारी हैं।
जयपुर में विद्यार्थियों के प्रदर्शन के बाद प्रधानाचार्य निलंबित
जयपुर के पोद्दार स्कूल में 5 अगस्त को श्रवण एवं वाक् बाधित विद्यार्थियों ने छात्रावास की कथित खराब व्यवस्था, सुविधाओं की कमी और दुर्व्यवहार के आरोपों को लेकर प्रदर्शन किया था। इसके बाद सरकार ने उसी दिन स्कूल के प्रधानाचार्य को निलंबित कर दिया।
इसके बाद नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों से मुलाकात की। 20 अगस्त को कांग्रेस की ओर से स्कूल से विधानसभा तक मार्च भी निकाला गया।
जालोर में ताला लगाने के बाद शिक्षकों की व्यवस्था
जालोर में शिक्षकों की कमी से परेशान विद्यार्थियों ने स्कूल के मुख्य द्वार पर ताला लगा दिया था। प्रदर्शन के बाद प्रशासन ने तत्काल पांच शिक्षकों की व्यवस्था की और तीन अन्य शिक्षकों की नियुक्ति का आश्वासन दिया।
अलवर के थानागाजी क्षेत्र के जौधावास राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में भी विद्यार्थियों ने 13 और 14 अगस्त को स्कूल परिसर में धरना दिया। छात्रों की मांगों के बाद प्रशासन ने उन्हें लिखित आश्वासन दिया। भरतपुर में भी छात्रों के आंदोलन के बाद शिक्षा विभाग को प्रधानाचार्य का स्थानांतरण रद्द करना पड़ा।
स्थानीय समस्याएं, लेकिन मांगों में समानता
इन प्रदर्शनों की वजह अलग-अलग है, लेकिन छात्रों की मांगों में काफी समानता दिखाई दे रही है। कहीं शिक्षकों की कमी है, कहीं स्कूल भवनों की स्थिति खराब है, तो कहीं छात्रावासों में पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। कुछ जगह विद्यार्थी वर्दी, खेल और सैन्य प्रशिक्षण जैसी आवश्यक सुविधाओं की मांग कर रहे हैं।
छात्रों के लगातार सामने आ रहे इन विरोध-प्रदर्शनों के बीच राजस्थान सरकार ने सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने की योजना भी तैयार की है। इसके तहत आने वाले वर्षों में स्कूल भवनों, नए कक्षों, शौचालयों, मरम्मत कार्यों और तकनीकी सुविधाओं पर बड़े स्तर पर खर्च करने का रोडमैप तैयार किया गया है।
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