सुप्रीम कोर्ट पहुंचा चुनाव आयोग विवाद, सीईसी ज्ञानेश कुमार पर एकतरफा फैसलों के आरोप; याचिका में उठे ये सवाल
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग के नाम पर कुछ फैसले अन्य दो निर्वाचन आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए। याचिकाकर्ता ने ऐसे फैसलों और उनसे जुड़े निर्देशों को चुनौती दी है।
याचिका में कहा गया है कि निर्वाचन आयोग एक बहुसदस्यीय संवैधानिक संस्था है और उसके फैसले निर्धारित प्रक्रिया के तहत लिए जाने चाहिए। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में आयोग के अन्य सदस्यों की सहमति के बिना फैसले लिए गए। याचिका में ऐसे फैसलों को शुरू से ही अमान्य घोषित करने की मांग की गई है।
याचिका में मतदाता सूची और फॉर्म-6 में किए गए बदलावों का भी मुद्दा उठाया गया है। याचिकाकर्ता का दावा है कि फॉर्म-6 में बदलाव निर्धारित कानूनी प्रक्रिया और आयोग के सभी सदस्यों की सहमति के अनुरूप नहीं किए गए। इन बदलावों को रद्द करने की मांग भी की गई है।
याचिका में मुख्य निर्वाचन आयुक्त और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग भी की गई है। साथ ही, कथित तौर पर बिना पूरी सहमति के लिए गए फैसलों, निर्देशों और सॉफ्टवेयर में किए गए बदलावों की जांच कराने की मांग रखी गई है।
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से क्वो वारंटो समेत उचित संवैधानिक राहत देने की मांग की है। संविधान का अनुच्छेद 324 निर्वाचन आयोग से संबंधित प्रावधान करता है, जबकि सुप्रीम कोर्ट को अनुच्छेद 32 के तहत मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए विभिन्न रिट जारी करने का अधिकार है।
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