डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की जयंती आज, देश कर रहा ‘मिसाइल मैन’ को नमन
नई दिल्ली। भारत के पूर्व राष्ट्रपति, महान वैज्ञानिक, लेखक और भारत रत्न डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की जयंती पर देश उन्हें श्रद्धापूर्वक याद कर रहा है। 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु के रामेश्वरम में जन्मे डॉ. कलाम ने विज्ञान, रक्षा और अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्हें ‘मिसाइल मैन ऑफ इंडिया’ और ‘जनता के राष्ट्रपति’ के नाम से भी जाना जाता है।

डॉ. कलाम ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) में काम करते हुए देश के पहले स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपण यान एसएलवी-3 के विकास में अहम भूमिका निभाई। जुलाई 1980 में इसी प्रक्षेपण यान के जरिए रोहिणी उपग्रह को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किया गया। बाद में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) में उन्होंने देश के स्वदेशी मिसाइल कार्यक्रम को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। अग्नि और पृथ्वी मिसाइलों के विकास से जुड़ी उनकी भूमिका ने उन्हें देशभर में पहचान दिलाई।
डॉ. कलाम 25 जुलाई 2002 को भारत के 11वें राष्ट्रपति बने और 2007 तक इस पद पर रहे। राष्ट्रपति के रूप में उन्होंने विद्यार्थियों और युवाओं से संवाद को विशेष महत्व दिया। उनका मानना था कि देश का भविष्य युवाओं की शिक्षा, वैज्ञानिक सोच, मेहनत और नवाचार पर निर्भर करता है। वह विद्यार्थियों को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए निरंतर प्रयास करने की प्रेरणा देते थे।

विज्ञान के साथ-साथ लेखन के क्षेत्र में भी डॉ. कलाम की महत्वपूर्ण पहचान रही। उनकी चर्चित पुस्तकों में ‘विंग्स ऑफ फायर’, ‘इंडिया 2020’, ‘इग्नाइटेड माइंड्स’ और ‘माई जर्नी’ शामिल हैं। इन पुस्तकों में उन्होंने भारत के विकास, शिक्षा, आत्मनिर्भरता और युवाओं की भूमिका पर अपने विचार रखे।
डॉ. कलाम को वर्ष 1981 में पद्म भूषण, 1990 में पद्म विभूषण और 1997 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया। 27 जुलाई 2015 को शिलांग में विद्यार्थियों को संबोधित करते समय उनका निधन हो गया।

डॉ. कलाम का जीवन सादगी, ज्ञान, मेहनत और राष्ट्रसेवा का प्रतीक माना जाता है। उनकी जयंती पर उन्हें नमन करते हुए देशवासी उनके विचारों और विकसित भारत के सपने को याद कर रहे हैं। उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों को विज्ञान, शिक्षा और देश के विकास के लिए प्रेरित करता रहेगा।
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