ट्रंप के ऊर्जा सीजफायर को ब्रिटेन-कनाडा का समर्थन, रूस की चुप्पी से बढ़ा सस्पेंस
रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहल को ब्रिटेन और कनाडा का समर्थन मिला है। हालांकि, रूस की ओर से सीजफायर पर स्पष्ट सहमति सामने नहीं आने और यूक्रेन के ऊर्जा संयंत्रों पर हमलों की खबरों के बीच इस पहल को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
ट्रंप ने 11 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर दावा किया था कि रूस और यूक्रेन ऊर्जा ठिकानों पर एक-दूसरे के हमले रोकने के लिए सहमत हो गए हैं। इसके बाद कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने इस पहल का समर्थन करते हुए रूस से समझौते का पालन करने की अपील की। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने भी ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने के लिए तत्काल और स्थायी युद्धविराम का समर्थन किया।
वहीं, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा कि उनका देश सीजफायर का समर्थन करता है, लेकिन रूस को भी हमले रोकने होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी पक्ष से समझौते की स्पष्ट जानकारी का इंतजार है। जेलेंस्की के मुताबिक, सीजफायर की घोषणा के बाद भी यूक्रेन के ऊर्जा ठिकानों पर हमले किए गए।
रूस की ओर से शुरुआती दौर में इस समझौते की पुष्टि नहीं की गई थी। 13 अक्टूबर को क्रेमलिन ने कहा कि ऊर्जा सीजफायर को लेकर संपर्क जारी हैं, लेकिन बातचीत के विवरण सार्वजनिक नहीं किए। इससे यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि दोनों पक्षों के बीच वास्तव में किस स्तर पर सहमति बनी है।
ब्रिटेन और कनाडा का समर्थन इस पहल को कूटनीतिक मजबूती देता है, लेकिन सीजफायर की सफलता रूस और यूक्रेन की ओर से वास्तविक रूप से हमले रोकने तथा समझौते की शर्तें स्पष्ट होने पर निर्भर करेगी। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह पहल ऊर्जा ढांचे पर हमलों को रोककर युद्ध के असर को कम कर पाएगी या अनिश्चितता बनी रहेगी।
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