1965 की जंग के वीर योद्धा अल्फ्रेड कुक का निधन, चार पाकिस्तानी विमानों से अकेले लिया था लोहा
नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना के फ्लाइट लेफ्टिनेंट (सेवानिवृत्त) अल्फ्रेड टायरोन कुक का शुक्रवार देर रात दिल्ली में निधन हो गया। 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में उनके साहस और अदम्य हौसले की कहानी आज भी याद की जाती है। वीर चक्र से सम्मानित कुक ने हवाई मुकाबले में चार पाकिस्तानी जेट्स का अकेले सामना किया था।
हवाई लड़ाई के दौरान कुक के विमान का गोला-बारूद खत्म हो गया था, लेकिन उन्होंने पीछे हटने के बजाय चौथे पाकिस्तानी विमान का पीछा जारी रखा। उनके लगातार दबाव के बाद वह विमान पीछे हट गया। कुक ने इस घटना को अपने अंतिम इंटरव्यू में याद किया, जो निधन से तीन दिन पहले एक समाचार चैनल के कार्यक्रम में हुआ था।
1968 में भारतीय वायुसेना से सेवानिवृत्त होने के बाद कुक ऑस्ट्रेलिया में बस गए थे, लेकिन अपनी स्क्वाड्रन और भारत से उनका जुड़ाव बना रहा। उन्होंने इच्छा जताई थी कि निधन के बाद उनका अंतिम संस्कार भारत में किया जाए और उनकी अस्थियां देश की पवित्र नदियों में विसर्जित हों।
कुक भारतीय वायुसेना की 14 स्क्वाड्रन ‘द बुल्स’ के 75वें स्थापना वर्ष समारोह में शामिल होने के लिए हाल ही में भारत आए थे। दिल्ली प्रवास के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें सैन्य अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली।
अपने अंतिम इंटरव्यू में कुक ने 1965 की हवाई जंग की यादें साझा करते हुए युवा पीढ़ी के लिए देशभक्ति का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि युद्ध या संकट के समय केवल आधुनिक विमान ही निर्णायक नहीं होते, बल्कि पायलट का हौसला, गहन प्रशिक्षण और अपने विमान पर अटूट विश्वास भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
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