एआई: ‘तकनीक के लाभ अपनाएं, लेकिन संवैधानिक मूल्यों से न हटें’, बोले सीजेआई सूर्यकांत
नई दिल्ली। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने न्याय व्यवस्था में डिजिटल तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को अपनाने की जरूरत पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि तकनीकी प्रगति का लाभ न्याय व्यवस्था को मिलना चाहिए, लेकिन इसके साथ संविधान में निहित गरिमा, समानता, स्वतंत्रता और निष्पक्षता जैसे मूल्यों की रक्षा भी सुनिश्चित करनी होगी।
सीजेआई सूर्यकांत ने उज्बेकिस्तान के समरकंद में एशियन कॉन्स्टिट्यूशनल कोर्ट्स एसोसिएशन के सातवें कांग्रेस के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि तकनीक समाज, सरकार और सार्वजनिक संस्थानों के कामकाज को तेजी से बदल रही है। ऐसे में अदालतें भी इस बदलाव से अछूती नहीं रह सकतीं। उन्होंने कहा कि डिजिटलाइजेशन से अदालतों तक लोगों की पहुंच आसान हो सकती है, मामलों में होने वाली देरी कम की जा सकती है और न्यायिक प्रक्रियाओं को सरल बनाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस न्यायाधीशों और अदालत के कर्मचारियों को कानूनी शोध तथा बड़ी मात्रा में जानकारी को व्यवस्थित करने में सहायता कर सकता है। हालांकि, तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के बीच यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि बदलती परिस्थितियों के बावजूद कौन से मूल सिद्धांत कायम रहने चाहिए। उनके अनुसार, संवैधानिक अदालतों के लिए इसका जवाब उन मूल्यों में है, जिनकी रक्षा की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी गई है।
सीजेआई ने कहा कि अदालतों का काम केवल मामलों का फैसला करना नहीं है, बल्कि संविधान में किए गए गरिमा, समानता, स्वतंत्रता और निष्पक्षता के वादों को प्रभावी अर्थ देना भी है। उन्होंने तकनीक और परंपरा को एक-दूसरे के विरोध में देखने के बजाय न्यायिक संस्थानों में तकनीक के लाभों को अपनाने और संविधान को मार्गदर्शक बनाए रखने पर जोर दिया।
उन्होंने एशिया की संवैधानिक अदालतों के बीच सहयोग और अनुभवों के आदान-प्रदान की जरूरत पर भी जोर दिया। इस बार एएसीसी कांग्रेस की थीम ‘डिजिटलाइजेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में संवैधानिक न्याय’ रखी गई है।
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