छह साल बाद बिजली विभाग में भर्ती की तैयारी, 50 हजार से अधिक पद खाली
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बिजली विभाग में करीब छह साल के लंबे अंतराल के बाद खाली पदों पर भर्ती की तैयारी शुरू हो गई है। विभाग में रिक्त पदों का आंकड़ा जुटाया जा रहा है। इसके बाद विद्युत सेवा आयोग को भर्ती का प्रस्ताव भेजा जाएगा। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, विभाग में स्वीकृत पदों के मुकाबले 50 हजार से अधिक पद खाली हैं, जिससे उपभोक्ता सेवाओं पर भी असर पड़ रहा है।
बिजली विभाग में चारों श्रेणियों में कुल 73 हजार से अधिक पद स्वीकृत हैं। हालांकि, इनमें से केवल 25 से 27 हजार नियमित अधिकारी-कर्मचारी ही कार्यरत हैं। इसके अलावा संविदा और ठेके पर करीब 70 हजार कर्मचारी काम कर रहे हैं। नियमित कर्मचारियों की कमी के कारण बिजली उपभोक्ताओं को मिलने वाली सेवाओं पर असर पड़ने की बात सामने आई है।
विभाग में श्रेणीवार रिक्त पदों की बात करें तो प्रथम श्रेणी में 1,708, द्वितीय श्रेणी में 3,369, तृतीय श्रेणी में 40,534 और चतुर्थ श्रेणी में 27,911 पद स्वीकृत हैं। इनमें से तृतीय श्रेणी के करीब 14 हजार और चतुर्थ श्रेणी के 24 हजार से अधिक पद खाली बताए गए हैं। विभाग की ओर से फिलहाल कार्यात्मक जरूरतों का आकलन किया जा रहा है, जिसके आधार पर भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
यह मामला राज्य सलाहकार समिति की बैठक में भी उठाया गया था। इसके बाद नियामक आयोग ने विभाग को खाली पदों के कारण उपभोक्ता सेवाओं पर पड़ रहे प्रभाव का आकलन कर भर्ती के निर्देश दिए थे। टीजी-2, जेई, एकाउंटेंट, एई और समीक्षा अधिकारी जैसे पदों पर नियुक्तियों की तैयारी की जा रही है।
उपभोक्ता सेवाओं के लिए नियमित कर्मचारियों की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है। विभाग के अधिकारियों के अनुसार, एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग व्यवस्था लागू होने के बाद बिलिंग जैसी सेवाओं के लिए नियमित कर्मचारियों के पासवर्ड जनरेट किए जाते हैं। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू कराने के लिए नियामक आयोग में प्रस्ताव दाखिल किया जाएगा।
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