38 वर्षों की सेवा के बाद कैलाश मकवाणा को मिले व्यापक रणनीतिक दायित्व की मांग, पुलिस सुधार से लेकर साइबर सुरक्षा तक की जिम्मेदारी का प्रस्ताव
भोपाल। मध्यप्रदेश के पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा के 1 दिसंबर 2026 को लगभग 38 वर्षों का सेवाकाल पूरा करने के मद्देनजर उनके अनुभव और विशेषज्ञता के उपयोग को लेकर एक प्रस्ताव सामने आया है। ‘मेनिट लीगेसी’ की ओर से जारी अपील में कहा गया है कि उनकी सेवानिवृत्ति को केवल एक वरिष्ठ अधिकारी के सेवाकाल की समाप्ति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि उनके अनुभव का उपयोग राज्यहित में व्यापक रणनीतिक दायित्व देकर किया जाना चाहिए।
अपील में कहा गया है कि मकवाणा ने पुलिस प्रशासन, इंटेलिजेंस, आंतरिक सुरक्षा, लोकायुक्त, पुलिस अधोसंरचना और आधुनिक तकनीक जैसे विभिन्न क्षेत्रों में काम किया है। इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि और आईआईटी दिल्ली से उच्च तकनीकी शिक्षा प्राप्त होने के कारण उनकी तकनीकी समझ और मैदानी पुलिस प्रशासन के अनुभव को विशेष रूप से उपयोगी बताया गया है।

प्रस्ताव में राज्य सरकार से उनके लिए किसी सामान्य सलाहकार या औपचारिक पद के बजाय स्पष्ट अधिकार, लक्ष्य और परिणामों वाला रणनीतिक दायित्व तैयार करने पर विचार करने की अपील की गई है। इसके तहत ‘चीफ डीजीपी/स्टेट पुलिस चीफ फॉर स्ट्रैटेजिक रिफॉर्म्स’ जैसी नई भूमिका अथवा इसी प्रकृति के विशेष प्रशासनिक पद का सुझाव दिया गया है।
इस संभावित भूमिका के तहत पुलिस आधुनिकीकरण, आंतरिक सुरक्षा, खुफिया समन्वय, साइबर अपराध, डिजिटल सुरक्षा, भ्रष्टाचार निरोधक व्यवस्था, पुलिस जवाबदेही, प्रशिक्षण और तकनीक आधारित पुलिसिंग जैसे क्षेत्रों में व्यापक सुधार की जिम्मेदारी देने का प्रस्ताव रखा गया है।

इसके अलावा ‘मध्यप्रदेश पुलिस, सुरक्षा एवं शासन सुधार मिशन’, ‘स्टेट पुलिस मॉडर्नाइजेशन एंड स्मार्ट पुलिसिंग मिशन’, ‘स्टेट साइबर क्राइम एंड डिजिटल सिक्योरिटी मिशन’ और ‘पुलिस एवं गवर्नेंस रिफॉर्म्स कमीशन’ जैसे विकल्प भी सुझाए गए हैं। इनका उद्देश्य अगले तीन से पांच वर्षों में पुलिसिंग और सुरक्षा व्यवस्था में मापनीय सुधार लाना बताया गया है।
अपील में यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी नए दायित्व को अंतिम रूप देने से पहले मध्यप्रदेश शासन को स्वयं कैलाश मकवाणा से विस्तृत विचार-विमर्श करना चाहिए। उनकी सहमति, रुचि, उपलब्धता और विशेषज्ञता के अनुरूप ही भविष्य की भूमिका तय करने की बात कही गई है।

प्रस्ताव रखने वालों का कहना है कि यह किसी व्यक्ति के लिए पद की मांग नहीं, बल्कि राज्यहित में लंबे प्रशासनिक अनुभव और विशेषज्ञता के बेहतर उपयोग का सुझाव है। उनका मानना है कि मकवाणा के अनुभव को पुलिस सुधार, आंतरिक सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, भ्रष्टाचार निरोधक व्यवस्था और सुशासन से जुड़े दीर्घकालीन मिशन में लगाया जा सकता है।
अपील में कहा गया है कि मध्यप्रदेश पुलिस सुधार और तकनीक आधारित शासन का ऐसा मॉडल विकसित कर सकता है, जिसे देश के अन्य राज्य भी अपनाएं। 38 वर्षों की सेवा के बाद मकवाणा को मिलने वाला अगला दायित्व केवल एक पद न होकर ऐसा मिशन होना चाहिए, जिसका प्रभाव आने वाले वर्षों तक दिखाई दे।
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