मध्य प्रदेश कैबिनेट के बड़े फैसले: 41 हजार करोड़ से अधिक के प्रस्ताव मंजूर, 3 नए प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालयों को हरी झंडी
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में 1 सितंबर को हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में प्रदेश के विकास, ग्रामीण रोजगार, सड़क, डेयरी, तकनीकी शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी गई। कैबिनेट ने लगभग 41 हजार करोड़ रुपये से अधिक के वित्तीय प्रस्तावों और जनकल्याणकारी निर्णयों को स्वीकृति दी।
कैबिनेट ने विकसित भारत ग्रामीण योजना और इसके मध्य प्रदेश में 1 जुलाई 2026 से प्रभावी किए जाने का अनुसमर्थन किया। योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों के इच्छुक वयस्क सदस्यों को अब 100 के बजाय 125 दिनों के श्रमजन्य रोजगार की वैधानिक गारंटी देने का प्रावधान किया गया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में योजना की अनुमानित लागत 3,183 करोड़ रुपये और वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक कुल अनुमानित लागत 26,436 करोड़ रुपये होगी। प्रत्येक जिले में शिकायतों के त्वरित निराकरण के लिए लोकपाल की नियुक्ति भी की जाएगी।
दुग्ध उत्पादकों के हित में कैबिनेट ने 2,973 करोड़ रुपये की डेयरी विकास योजना को मंजूरी दी। इसके तहत अगले पांच वर्षों में सहकारी दुग्ध समितियों का विस्तार 7,331 से बढ़ाकर 26 हजार गांवों तक किया जाएगा। दूध संकलन क्षमता को 12 लाख किलोग्राम प्रतिदिन से बढ़ाकर 52 लाख किलोग्राम और प्रसंस्करण क्षमता को 17.8 लाख लीटर से बढ़ाकर 63.3 लाख लीटर प्रतिदिन करने का लक्ष्य रखा गया है।
सड़क परियोजनाओं के तहत पश्चिम भोपाल बायपास के 35.61 किलोमीटर लंबे 4-लेन मार्ग के निर्माण के लिए 3,225 करोड़ 51 लाख रुपये की पुनरीक्षित स्वीकृति दी गई। इसके अलावा निर्माण पूर्व कार्यों के लिए 548 करोड़ 29 लाख रुपये के भुगतान को भी मंजूरी दी गई। इस बायपास के बनने से जबलपुर और नर्मदापुरम की ओर से इंदौर जाने वाले वाहनों को भोपाल शहर से होकर नहीं गुजरना पड़ेगा और करीब 21 किलोमीटर की दूरी कम होने की उम्मीद है।
मेहलुआ-बीना-खिमलासा-मालथौन मार्ग के 67.116 किलोमीटर हिस्से को 4-लेन मय पेव्ड शोल्डर के साथ बनाने के लिए 2,776 करोड़ 83 लाख रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई। यह मार्ग बीना के औद्योगिक क्षेत्र और प्रमुख परिवहन मार्गों को बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेगा।
तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव करते हुए प्रदेश में तीन नए प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय स्थापित करने की मंजूरी दी गई है। भोपाल में मध्य भारत प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय, उज्जैन में मालवा प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय और जबलपुर में महाकौशल प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय स्थापित किए जाएंगे। वर्तमान राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले तकनीकी संस्थानों को संभागवार इन तीन विश्वविद्यालयों के क्षेत्राधिकार में बांटा जाएगा।
स्वास्थ्य संस्थानों में मशीनों और उपकरणों के रखरखाव के लिए 2026 से 2031 तक 488 करोड़ 41 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई। वहीं चिकित्सा संस्थाओं की परिसंपत्तियों के संधारण के लिए 915 करोड़ 77 लाख रुपये मंजूर किए गए।
नवगठित जिलों मैहर, मऊगंज और पांढुर्णा में सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के जिला कार्यालयों के लिए 15 नियमित पद सृजित करने तथा 6 आउटसोर्स मानव संसाधन रखने की स्वीकृति दी गई। इसके अलावा निवाड़ी, मऊगंज, पांढुर्णा और मैहर में जिला आयुष कार्यालयों के संचालन के लिए 20 पदों के सृजन को भी मंजूरी दी गई।
किसानों से जुड़ा महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए कैबिनेट ने रबी विपणन वर्ष 2026 में मूंग और उड़द के उपार्जन के संबंध में मुख्यमंत्री के निर्णय का अनुसमर्थन किया। इसके तहत पंजीकृत किसानों से मूंग की उपज का 60 प्रतिशत तक उपार्जन किए जाने के फैसले को मंजूरी दी गई है।
बैठक में लिए गए इन फैसलों को ग्रामीण रोजगार, किसानों, दुग्ध उत्पादकों, तकनीकी शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और सड़क अधोसंरचना को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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