मार्मिक संदेश: एक आम नागरिक की 6 साल लंबी कानूनी लड़ाई
इस देश में न्याय पाना क्या सचमुच एक आम नागरिक, विशेषकर छोटे शहरों के बाशिंदों के लिए एक असंभव सपना बन गया है? मैं एक लॉ ग्रेजुएट होने के बावजूद पिछले 6 सालों से न्याय के लिए दर-दर भटक रहा हूँ। मैंने सैकड़ों शिकायतें कीं, पुलिस अधीक्षकों से गुहार लगाई और जनप्रतिनिधियों व मंत्रियों के दरवाजे खटखटाए—लेकिन प्रशासनिक तंत्र पर कोई असर नहीं हुआ।
मेरा यह संदेश किसी भी विभाग या अधिकारी की कार्यप्रणाली पर निराधार सवाल उठाना नहीं है, बल्कि समाज और उच्चाधिकारियों के सामने ज़मीनी सच्चाई लाना है ताकि व्यवस्था अधिक पारदर्शी बन सके। जब एक कानून के जानकार व्यक्ति की यह स्थिति है, तो दूरदराज के गरीब और असहाय नागरिकों का क्या हाल होता होगा?
जब मध्य प्रदेश के अन्य जिलों (जैसे सीहोर) की पुलिस उन्हीं आरोपियों को गिरफ्तार कर सकती है, तो गुना पुलिस 6 साल बाद भी 'सुप्रीम कोर्ट के स्टे' का बहाना बनाकर अपराधियों को बचाने और सीएम हेल्पलाइन पर झूठी रिपोर्ट लगाकर शिकायत को फोर्स क्लोज करने में क्यों जुटी है? क्या कानून सिर्फ रसूखदारों के लिए है?"
प्रकरण का सारांश
घोटाले का स्वरूप: सहारा इंडिया चिटफंड कंपनी (क्यू शॉप सेंट्रल प्लान) द्वारा गुना जिले के निवेशकों (प्रार्थी के माता-पिता - श्री पवन कुमार जैन और श्रीमती आभा जैन) की गाढ़ी कमाई के करोड़ों रुपए हड़पने का मामला।

मुख्य आरोपी: जोनल मैनेजर शिवाजी सिंह, शाखा प्रबंधक शंकरचरण श्रीवास्तव एवं अन्य उच्च पदाधिकारी।
संघर्ष की अवधि: पिछले 6 वर्षों (2020 से अब तक) से लगातार लिखित शिकायतें, जनसुनवाई आवेदन और पोर्टल पर संघर्ष।
प्रशासनिक उदासीनता: एफआईआर दर्ज होने के बावजूद गुना पुलिस द्वारा आरोपियों की गिरफ्तारी में टालमटोल करना, झूठे कानूनी बहाने देना और सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों को बलपूर्वक बंद (Force Close) करना।
अन्य जिलों की कार्रवाई: जिस मुख्य आरोपी (शिवाजी सिंह) को गुना पुलिस पकड़ने में असमर्थ बता रही थी, उसे सीहोर और भोपाल पुलिस ने 2023/2025 में गिरफ्तार किया, जिससे गुना पुलिस के दावों की पोल खुलती है।
मामले की मुख्य समयरेखा (Timeline of Events)
दिसंबर 2020 – जनवरी 2021: डूबी राशि के भुगतान हेतु एसपी, कलेक्टर और थाना प्रभारी को लगातार आवेदन।
जनवरी – जुलाई 2021: विधायकों (जयवर्धन सिंह, गोपीलाल जाटव) और मंत्री (महेंद्र सिंह सिसोदिया) द्वारा पुलिस अधीक्षक को सख्त कार्रवाई हेतु पत्र।
12–14 अक्टूबर 2021: थाना कोतवाली गुना में निवेशकों की शिकायतों पर सहारा इंडिया के चेयरपर्सन व अधिकारियों के खिलाफ अपराध क्रमांक 756/2021 और 760/2021 (धारा 420, 406, 120बी एवं म.प्र. निक्षेपकों के हितों का संरक्षण अधिनियम) पंजीबद्ध।
30 जनवरी 2022: पुलिस द्वारा प्रार्थी के माता-पिता की निवेश रसीदें और मूल दस्तावेज जप्त किए गए।
दिसंबर 2022 – जनवरी 2023: एसपी कार्यालय में जनसुनवाई के माध्यम से फरार आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट और इनाम घोषित करने की मांग।
अप्रैल 2023: मुख्य आरोपी शिवाजी सिंह भोपाल पुलिस द्वारा गिरफ्तार, किंतु गुना पुलिस द्वारा कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।
फरवरी 2024: सीएम हेल्पलाइन पर औपचारिक शिकायत दर्ज (शिकायत क्र.)
मार्च 2024 – अक्टूबर 2025: पुलिस अधिकारियों और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से पत्राचार, लेकिन चालान न पेश होने से मूल दस्तावेज भी अटकाए रखे गए।
अगस्त – अक्टूबर 2026: गुना पुलिस द्वारा सुप्रीम कोर्ट के स्टे का हवाला देकर 01 अक्टूबर 2026 को सीएम हेल्पलाइन की शिकायत को 'मांग' श्रेणी बताकर जबरन फोर्स क्लोज कर दिया गया।
निवेदन (Request to Authorities)
श्रीमान से विनम्र अनुरोध है कि इस गंभीर प्रकरण को अत्यंत संवेदनशीलता से लेते हुए निम्नलिखित बिंदुओं पर उचित कार्रवाई हेतु इसे प्रेषित करने की कृपा करें:
गुना कोतवाली थाना अंतर्गत दर्ज अपराध क्रमांक 760/2021 में टालमटोल कर रहे लापरवाह अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
अन्य जिलों की तर्ज पर गुना में भी फरार एवं नामजद आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए।
सीएम हेल्पलाइन पर झूठी रिपोर्ट लगाकर शिकायत बंद करने वाले दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए प्रार्थी को न्याय दिलाया जाए।
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