मऊ में तीन पूर्व एसपी के खिलाफ विभागीय जांच शुरू, सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में 14 वर्षीय किशोर के अपहरण के मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी के बाद तीन पूर्व पुलिस अधीक्षकों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने के आदेश जारी किए गए हैं। जांच के दायरे में आईपीएस अविनाश पांडेय, इलामारन और कमलेश बहादुर शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में पुलिस की लापरवाही और मुकदमे की धीमी प्रगति पर नाराजगी जताई थी।
यह मामला वर्ष 2017 में 14 वर्षीय किशोर सचिन मौर्य के कथित अपहरण से जुड़ा है। किशोर के लापता होने के बाद पुलिस ने छह आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था, लेकिन लंबे समय तक उसका कोई सुराग नहीं मिल सका। मार्च 2023 में आरोप तय होने के बाद अभियोजन पक्ष के 54 गवाहों में से केवल दो के बयान दर्ज हो पाए थे। इस स्थिति पर अदालत ने गंभीर सवाल उठाए।
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि वर्ष 2023 से मऊ जिले में पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात रहे अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की जाए। अदालत ने अगली सुनवाई, 16 नवंबर तक, इस संबंध में की गई कार्रवाई का विवरण देने और व्यक्तिगत रूप से सत्यापित हलफनामा दाखिल करने का भी निर्देश दिया है।
अदालत ने कहा कि मुकदमे की सुनवाई के दौरान गवाहों को पेश करना और अभियोजन की प्रगति सुनिश्चित करना संबंधित एजेंसियों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। लंबे समय तक गवाहों के बयान दर्ज नहीं हो पाना और लापता किशोर का पता नहीं चलना पुलिस तथा अभियोजन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
किशोर के परिवार ने पुलिस की जांच से असंतुष्ट होकर न्यायालय का रुख किया था। अब विभागीय जांच में संबंधित अधिकारियों की भूमिका और जिम्मेदारी की पड़ताल की जाएगी। जांच शुरू होने का अर्थ यह नहीं है कि अधिकारियों के खिलाफ आरोप सिद्ध हो गए हैं। मामले में आगे की कार्रवाई जांच और अदालत के निर्देशों के अनुपालन के आधार पर होगी।
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