ऑनलाइन सट्टे पर कानून का इंतजार: 2023 का वादा अधूरा, कब बनेगा नया जुआ अधिनियम?

Saturday, April 25, 2026 - 12:59
Updated: 4 months ago
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ऑनलाइन सट्टे पर कानून का इंतजार: 2023 का वादा अधूरा, कब बनेगा नया जुआ अधिनियम?

भोपाल/गुना (आरएनआई)। मध्यप्रदेश में ऑनलाइन गैंबलिंग और सट्टेबाजी के बढ़ते प्रभाव के बीच नया जुआ अधिनियम लाने का वादा अब तक अधूरा ही बना हुआ है। अप्रैल 2023 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ऑनलाइन गैंबलिंग पर चिंता जताते हुए राज्य में नया सार्वजनिक जुआ अधिनियम लाने की बात कही थी, लेकिन तीन साल बाद भी यह कानून लागू नहीं हो सका है।

वर्तमान में डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार अपराध नियंत्रण को लेकर प्रतिबद्धता जता रही है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक कानून मजबूत नहीं होंगे, तब तक इस दिशा में ठोस परिणाम मिलना मुश्किल है। प्रदेश में अभी भी 150 साल पुराना सार्वजनिक जुआ अधिनियम 1876 लागू है, जिसमें ऑनलाइन गैंबलिंग को लेकर कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है।

आईपीएल जैसे बड़े आयोजनों के दौरान ऑनलाइन सट्टेबाजी का नेटवर्क और सक्रिय हो जाता है, जिससे युवाओं में इसकी लत तेजी से बढ़ रही है। इसके चलते आर्थिक अपराध, वसूली, आत्महत्या और हिंसा जैसी घटनाओं में भी इजाफा देखने को मिल रहा है। आरोप यह भी हैं कि इस अवैध धंधे में संगठित गिरोह सक्रिय हैं और उन्हें संरक्षण भी मिल रहा है।

2023 में इस समस्या से निपटने के लिए राज्य सरकार ने एक टास्क फोर्स का गठन किया था, जिसकी अध्यक्षता तत्कालीन अपर मुख्य सचिव गृह डॉ. राजेश राजौरा ने की थी। इस टास्क फोर्स ने नए जुआ अधिनियम का प्रारूप तैयार किया था, जिसमें ऑनलाइन गैंबलिंग को कानून के दायरे में लाने और सख्त सजा के प्रावधान शामिल किए गए थे। प्रस्तावित कानून में जुआघर संचालित करने पर सजा बढ़ाकर तीन साल तक करने और जुर्माने की राशि में वृद्धि का सुझाव भी दिया गया था।

हालांकि, यह ड्राफ्ट अंतिम रूप लेने और लागू होने से पहले ही ठंडे बस्ते में चला गया। उस समय इस मुद्दे पर सियासत भी तेज हुई थी। कांग्रेस नेता पीसी शर्मा और दिग्विजय सिंह ने सरकार पर सवाल उठाते हुए ऑनलाइन सट्टेबाजी पर कार्रवाई को लेकर गंभीरता पर प्रश्नचिह्न लगाया था।

अब, जब ऑनलाइन जुआ और सट्टेबाजी समाज के लिए बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं, तब नए और सख्त कानून की जरूरत और भी ज्यादा महसूस की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अपराध की गंभीरता के अनुसार सजा और दंड के प्रावधान तय किए जाएं, तो ही इस समस्या पर प्रभावी नियंत्रण संभव हो पाएगा। फिलहाल सवाल यही है कि सरकार आखिर कब इस दिशा में ठोस कदम उठाएगी।

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