बेटे के मांगने से पहले भोजन दैना बेटे के लिए वरदान है: मुनिश्री सुधासागर जी महाराज
गुना (आरएनआई) राजा बेटा माँ से कभी रोटी मांग कर नहीं खाता है क्योंकि मांग कर तो बेटा नहीं भिखारी खाता है। यदि बेटा योग्य हो जाये तो पिता को अपनी वसीयत बिना मागे बेटे को दे देना चाहिए क्यों कि बिना मागे दी गई वसीयत सर्वश्रेष्ठ होती है। यह उद्गार जगत पूज्य मुनिश्री सुधा सागर जी महाराज ने आज धर्मसभा को संबोधित करते हुयें व्यक्त किया है।
मुनिश्री ने कहा यदि बेटा बड़ा (योग्य) हो जाए तो पिता को अपनी संपत्ति बिना मागे ही दे देना चाहिए क्योंकि बिना मागे दी गयी संपत्ति बच्चों के लिए वरदान होती है। उन्होंने कहा बिना मागे पापा से जो वसीयत कोड़ी के रूप में मिलेगी वह करोड़ो की हो जाएगी। वही दूसरी ओर बच्चों को आगाह करते हुए कहा कभी भी पिता की संपत्ति पर अपनी नियत खराब नहीं करना अन्यथा जीवन में कभी भी सफल नहीं हो पाओगे। माँ और बेटे के सम्बन्ध में मुनिश्री ने कहा कभी बेटा भोजन करने आये तो माँ अथवा पत्नी को बिना मागे भोजन परोस देना चाहिए क्योंकि बिना मागे किया हुआ भोजन ही बच्चे की लिए वरदान होता है। परंतु आज यह परंपरा समाप्त हो गई है और इसका परिणाम यह है कि माँ और पत्नि द्वारा दिया गई भोजन वरदान सिद्ध नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा पहले बच्चा यदि खेलने जाता था तो माँ चिंता करके बच्चे को भोजन करती थी परन्तु आज यह सब समाप्त हो गया है।
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