गरीब पिता की 9 साल की लड़ाई खत्म, प्रियंका शुक्ला की पहल से बेटे देव प्रकाश को आजीवन कारावास से मिली मुक्ति
बिलासपुर/जांजगीर। आर्थिक तंगी के चलते कानूनी लड़ाई लड़ने में असमर्थ एक परिवार को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे देव प्रकाश यादव को डिवीजन बेंच ने बरी कर दिया है। यह फैसला 20 अगस्त 2026 को सुनाया गया। मामले में जनहित चैम्बर की अधिवक्ता प्रियंका शुक्ला ने कानूनी मदद की।
2015 में पिता दोषमुक्त, बेटे को मिली उम्रकैद
वर्ष 2015 के हत्या मामले में 70 वर्षीय बंशी यादव भी आरोपी थे, लेकिन अदालत ने उन्हें दोषमुक्त कर दिया था। वहीं उनके बेटे देव प्रकाश यादव को आजीवन कारावास और 500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। इसके बाद परिवार की आर्थिक स्थिति और कमजोर होती चली गई।
बंशी यादव के मुताबिक बेटे के जेल जाने के बाद उनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं रहा। आर्थिक परेशानी के बीच उनकी जमीन और घर पर कब्जे की शिकायत भी सामने आई। हालात इतने खराब हो गए कि उन्हें कई बार मंदिर या पेड़ के नीचे रात गुजारनी पड़ी और भीख मांगकर जीवन चलाना पड़ा।
2022 में अधिवक्ता प्रियंका शुक्ला से मिले
वर्ष 2022 में बंशी यादव एक अधिवक्ता साथी के माध्यम से प्रियंका शुक्ला के चैंबर पहुंचे। उनके पास मामले की पूरी फाइल और जरूरी दस्तावेज भी नहीं थे। उन्होंने बताया कि उनका बेटा कई वर्षों से जेल में है और परिवार निजी वकील का खर्च उठाने की स्थिति में नहीं है।
मामले की जानकारी जुटाने पर पता चला कि देव प्रकाश को वर्ष 2016 में ही हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी थी। हालांकि जमानतदार नहीं मिलने के कारण वह जेल से बाहर नहीं आ सका और करीब नौ साल तक जेल में रहा।
रिहाई के बाद अब सजा से भी मिली मुक्ति
प्रियंका शुक्ला ने वर्ष 2022 में आवश्यक कानूनी प्रक्रिया के तहत हाईकोर्ट में याचिका दायर की, जिसके बाद देव प्रकाश को मुचलके पर जेल से रिहा किया गया। रिहाई के बाद उसने अधिवक्ता का आभार जताया और भावुक हो गया।
इसके बाद मामले की कानूनी लड़ाई जारी रही। अब 20 अगस्त 2026 को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने देव प्रकाश यादव को आजीवन कारावास की सजा से भी बरी कर दिया। इस फैसले के बाद परिवार ने राहत की सांस ली है।
प्रियंका शुक्ला के मुताबिक, देव प्रकाश अपनी जमीन से जुड़ी परेशानी बताते हुए कई बार मदद की बात करता था। यहां तक कि वह अपनी जमीन देने की बात भी कहता था, लेकिन अधिवक्ता ने जमीन लेने से इनकार करते हुए केवल कानूनी मदद जारी रखने की बात कही।
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