गुनिया नदी में गंदगी डालना बंद करें, एक दिन वह भी माता की तरह पूज्य होगी : मुनि पुगव श्री सुधासागर जी
गुना (आरएनआई) नदियों का जल पवित्र होता इस कारण यह पूज्य होती है परंतु मनुष्य ने इन्हें भी गंदा कर दिया है इस कारण प्रकृति में जहर बढ़ता जा रहा है जबकि नदी मनुष्य के लिए वरदान है क्योंकि उसका जल पवित्र होता है । मनुष्य अपने जीवन में पांच बड़े पेड़ खर्च करता है अतः अपने जीवन ने पांच के स्थान पर छः पेड़ लगाये जिससे प्रकृति का संतुलन बना रहे । यह उदगार आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य जगत पूज्य मुनि पुगव श्री सुधासागर जी महाराज ने आज धर्मसभा को संबोधित करते हुयें व्यक्त किया है।


मुनि श्री ने कहा कि उद्योगों ने अपने उद्योगों का गंदा पानी नदियों में डाल कर उन्हें गंदा कर अपवित्र कर दिया है जबकि नदी का जल स्वच्छ और पावन होता था इस करने नदियों को माँ की तरह पूजा जाता था । आज गंगा, जमाना, नर्मदा, सरस्वती नदी का जल दूषित होने लगा है, जो नदी कभी जीवन दयानी मानी जाती थी आज वह दूषित होती जा रही है। उन्होंने कहा हम जिन नदियों को माता मान कर उनकी पूजा करते है उन्हें जिन उद्योगपतियों ने गंदा किया उनपर माता ही हत्या का मामला दर्ज किया जाना चाहिए। क्योंकि जो माता संसार को स्वच्छ जल प्रदान कर जीवन देती है उसका इस प्रकार से अपवित्र करना अपराध है। उन्होंने गुना की गुनिया नदी के संदर्भ में अपना मत देते हुए कहा यदि गुना से निकलने बाली गुनिया नदी में गुना के नागरिक गंदा पानी नहीं डालने का संकल्प ले तो एक दिन वह भी माता की तरह पूज्य हो जाएगी। प्रकृति पर अपना उद्बोधन देते हुए मुनि श्री ने कहा मनुष्य अपने जीवन में कम से कम पांच बड़े पेड़ो का उपयोग कर उन्हें नष्ट कर देता है यह प्रकृति के साथ अन्याय है अतः मनुष्य को अपने जीवन में कम से कम छः पेड़ अवश्य लगाना चाहिए, पांच पेड़ वह जो उसने अपने जीवन में खर्च किये है छठा पेड़ प्रकृति के संतुलन के लिये लगाना चाहिए । माता-पिता के उपकारों के सम्बन्ध में मुनि श्री ने कहा हर बच्चे को विचार करना चाहिए कि हमें जो माता-पिता ने दिया है तो उसके बदले हमने उन्हें क्या दिया है? हमे प्रकृति ने जो दिया हमने प्रकृति को क्या दिया है , यह विचार कर उनके उपकारों को चुकाना चाहिए परन्तु हम यह नहीं करते है उनके उपकारों को भूल कर उलटा करते है यह पाप है इसकी सजा प्रकृति देती है और आज देखने में भी आ रहा है।
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