कलेक्टर ने खुद चखा बच्चों का खाना, गुणवत्ता खराब मिली तो समूह हटाने के निर्देश
मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान 2026 के बीच युवा क्लेक्टर अर्पित वर्मा शुक्रवार को एक बार फिर एक्शन मोड में नजर आए। एकीकृत शासकीय माध्यमिक विद्यालय सेसई सड़क और बाल शिक्षा केंद्र (आंगनवाड़ी) के निरीक्षण में उन्होंने व्यवस्थाओं को सिर्फ फाइलों और रजिस्टरों में नहीं देखा बल्कि बच्चों को परोसा जा रहा मध्याह्न भोजन खुद खाकर उसकी गुणवत्ता परखी। भोजन कसौटी पर खरा नहीं उतरा तो कलेक्टर ने मौके पर ही संबंधित समूह को हटाने के निर्देश दे दिए।
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर वर्मा ने मध्याह्न भोजन की व्यवस्था देखी। उन्होंने बच्चों के लिए तैयार भोजन स्वयं चखकर यह जानने की कोशिश की कि सरकारी योजना के तहत बच्चों को वास्तव में कैसा खाना मिल रहा है। भोजन की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं मिलने पर उनका रुख सख्त हो गया। उन्होंने साफ कर दिया कि बच्चों के भोजन की गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
संबंधित समूह को हटाने के निर्देश के साथ यह संदेश भी गया कि मध्याह्न भोजन केवल सरकारी औपचारिकता नहीं है। बच्चों की थाली में गुणवत्तापूर्ण और निर्धारित मानकों के अनुरूप भोजन पहुंचना ही योजना का असली उद्देश्य है।
कलेक्टर की नाराजगी यहीं खत्म नहीं हुई। स्कूल और आंगनवाड़ी परिसर में गंदगी देखकर उन्होंने जिम्मेदारों को जमकर फटकार लगाई। जिस परिसर में छोटे बच्चे पढ़ते, खेलते और भोजन करते हैं, वहां साफ-सफाई में लापरवाही को उन्होंने गंभीरता से लिया।
कलेक्टर ने परिसर में नियमित साफ-सफाई रखने के सख्त निर्देश दिए। साथ ही लापरवाही के मामले में सचिव और जीआरएस के विरुद्ध कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए।
अब सिर्फ रजिस्टर नहीं मौके कलेक्टर एक्शन मोड में: बच्चों का खाना खुद चखा, गुणवत्ता खराब मिली तो समूह हटाने के निर्देश
सेसई सड़क के स्कूल-आंगनवाड़ी में गंदगी पर भड़के कलेक्टर अर्पित वर्मा, सचिव और जीआरएस पर भी कार्रवाई के निर्देश
मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान में औचक निरीक्षण, साफ संदेश—कागजों पर नहीं, जमीन पर चाहिए बेहतर व्यवस्था
शिवपुरी। मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान 2026 के बीच कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अर्पित वर्मा शुक्रवार को एक बार फिर एक्शन मोड में नजर आए। एकीकृत शासकीय माध्यमिक विद्यालय सेसई सड़क और बाल शिक्षा केंद्र (आंगनवाड़ी) के निरीक्षण में उन्होंने व्यवस्थाओं को सिर्फ फाइलों और रजिस्टरों में नहीं देखा, बल्कि बच्चों को परोसा जा रहा मध्याह्न भोजन खुद खाकर उसकी गुणवत्ता परखी। भोजन कसौटी पर खरा नहीं उतरा तो कलेक्टर ने मौके पर ही संबंधित समूह को हटाने के निर्देश दे दिए।
बच्चों की थाली तक पहुंचे कलेक्टर
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर वर्मा ने मध्याह्न भोजन की व्यवस्था देखी। उन्होंने बच्चों के लिए तैयार भोजन स्वयं चखकर यह जानने की कोशिश की कि सरकारी योजना के तहत बच्चों को वास्तव में कैसा खाना मिल रहा है। भोजन की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं मिलने पर उनका रुख सख्त हो गया। उन्होंने साफ कर दिया कि बच्चों के भोजन की गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
संबंधित समूह को हटाने के निर्देश के साथ यह संदेश भी गया कि मध्याह्न भोजन केवल सरकारी औपचारिकता नहीं है। बच्चों की थाली में गुणवत्तापूर्ण और निर्धारित मानकों के अनुरूप भोजन पहुंचना ही योजना का असली उद्देश्य है।
स्कूल-आंगनवाड़ी में गंदगी देख चढ़ा पारा
कलेक्टर की नाराजगी यहीं खत्म नहीं हुई। स्कूल और आंगनवाड़ी परिसर में गंदगी देखकर उन्होंने जिम्मेदारों को जमकर फटकार लगाई। जिस परिसर में छोटे बच्चे पढ़ते, खेलते और भोजन करते हैं, वहां साफ-सफाई में लापरवाही को उन्होंने गंभीरता से लिया।
कलेक्टर ने परिसर में नियमित साफ-सफाई रखने के सख्त निर्देश दिए। साथ ही लापरवाही के मामले में सचिव और जीआरएस के विरुद्ध कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए।
अब सिर्फ रजिस्टर नहीं, मौके पर परखी जा रही व्यवस्था
कलेक्टर अर्पित वर्मा के लगातार धुआंधार मैदानी निरीक्षणों से साफ संकेत मिल रहा है कि सरकारी योजनाओं की हकीकत अब दफ्तरों में बैठकर नहीं, सीधे गांव और संस्थाओं में जाकर परखी जाएगी। स्कूल हो, आंगनवाड़ी हो या बच्चों की थाली जिम्मेदारी तय होगी और कमी मिलने पर कार्रवाई भी होगी।
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