सोनिया गांधी ने क्यों ठुकराया था प्रधानमंत्री पद? ‘बिलॉन्गिंग’ में सामने आएगा निजी जिंदगी से सियासत तक का सफर
नई दिल्ली। कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी अपने संस्मरण के जरिए निजी जिंदगी से लेकर राजनीति तक के अपने लंबे सफर की कहानी सामने रखने जा रही हैं। उनकी किताब ‘बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ 10 नवंबर को अल्फ्रेड ए. नॉफ के प्रकाशन से जारी होगी। किताब में नेहरू-गांधी परिवार में उनके जीवन, निजी त्रासदियों, राजनीति में प्रवेश और प्रधानमंत्री पद स्वीकार न करने के फैसले से जुड़े प्रसंग शामिल होने की जानकारी है।
इटली में जन्मीं सोनिया गांधी की मुलाकात राजीव गांधी से इंग्लैंड के कैम्ब्रिज में पढ़ाई के दौरान हुई थी। राजीव गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के नाती और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बेटे थे। शादी के बाद सोनिया भारत आईं और नेहरू-गांधी परिवार का हिस्सा बनीं।
संस्मरण में सोनिया गांधी ने अपने जीवन की उन घटनाओं का भी जिक्र किया है, जिन्होंने उनकी निजी दुनिया को पूरी तरह बदल दिया। वर्ष 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या और इसके करीब सात साल बाद 1991 में राजीव गांधी की हत्या उनके जीवन की सबसे बड़ी त्रासदियों में शामिल रहीं। इन घटनाओं के बाद उनके जीवन और परिवार की जिम्मेदारियों में बड़े बदलाव आए।
सोनिया गांधी के मुताबिक, राजनीति में आने से पहले वह सार्वजनिक जीवन से दूरी बनाए रखना चाहती थीं और अपनी निजता को लेकर बेहद सजग थीं। हालांकि परिवार में हुई लगातार त्रासदियों और बदलती राजनीतिक परिस्थितियों ने अंततः उन्हें सक्रिय राजनीति में आने की ओर धकेला।
राजनीति में प्रवेश के बाद सोनिया गांधी ने कांग्रेस संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और लंबे समय तक पार्टी का नेतृत्व किया। उनके राजनीतिक सफर में चुनावी संघर्ष, केंद्र की सत्ता में कांग्रेस की वापसी और संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन के दौर की राजनीति जैसे कई महत्वपूर्ण अध्याय शामिल रहे।
उनके राजनीतिक जीवन का सबसे चर्चित फैसला 2004 में प्रधानमंत्री पद स्वीकार न करना रहा। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन को बहुमत मिलने के बाद सोनिया गांधी प्रधानमंत्री पद की प्रमुख दावेदार थीं, लेकिन उन्होंने यह पद स्वीकार नहीं किया। इसके बाद डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने।
प्रधानमंत्री पद ठुकराने के फैसले के पीछे उनकी व्यक्तिगत सोच और परिस्थितियां क्या थीं, इसे लेकर वर्षों से राजनीतिक बहस होती रही है। अब सोनिया गांधी अपने संस्मरण में इस फैसले और अपने राजनीतिक सफर को अपने नजरिए से सामने रखने वाली हैं।
‘बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ के जरिए सोनिया गांधी अपने जीवन के उन हिस्सों को भी साझा करेंगी, जो अब तक मुख्य रूप से सार्वजनिक घटनाओं और राजनीतिक इतिहास के जरिए ही सामने आते रहे हैं। ऐसे में किताब के प्रकाशन को सोनिया गांधी के निजी और राजनीतिक जीवन को समझने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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