सुप्रीम कोर्ट के ‘उद्योग’ की परिभाषा वाले फैसले पर कांग्रेस ने जताई चिंता, श्रमिक सुरक्षा को लेकर उठाए सवाल
कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट के औद्योगिक संबंधों से जुड़े हालिया फैसले पर चिंता जताई है। पार्टी ने कहा कि ‘उद्योग’ की परिभाषा को सीमित करने से श्रमिकों को मिलने वाले कानूनी संरक्षण का दायरा प्रभावित हो सकता है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 20 अगस्त 2026 को उत्तर प्रदेश राज्य बनाम जय बीर सिंह मामले में 1978 के चर्चित फैसले में तय ‘ट्रिपल टेस्ट’ की नए सिरे से समीक्षा की बात कही है। यह सिद्धांत बंगलूरू वाटर सप्लाई एंड सीवरेज बोर्ड बनाम ए. राजप्पा मामले में तय किया गया था।
क्या था 1978 का ‘ट्रिपल टेस्ट’?
जयराम रमेश के मुताबिक, 1978 के फैसले में किसी गतिविधि को ‘उद्योग’ मानने के लिए मुख्य रूप से तीन आधार बताए गए थे—व्यवस्थित गतिविधि, नियोक्ता और कर्मचारियों के बीच सहयोग तथा लोगों की जरूरतों को पूरा करने के लिए वस्तुओं या सेवाओं का उत्पादन या वितरण।
उन्होंने कहा कि उस फैसले में केवल लाभ कमाना ही उद्योग होने की अनिवार्य शर्त नहीं माना गया था। धर्मार्थ संस्थाओं और सार्वजनिक निकायों की कुछ गतिविधियां भी इसके दायरे में आ सकती थीं। वहीं, न्यायपालिका, कानून-व्यवस्था और रक्षा जैसे संप्रभु कार्यों को इससे अलग रखा गया था।
कांग्रेस ने औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 को लेकर भी सवाल उठाए। जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि सरकार की नई श्रम व्यवस्था ने श्रमिकों के लिए उपलब्ध सुरक्षा उपायों को कमजोर किया है। उन्होंने कहा कि ‘उद्योग’ की व्यापक परिभाषा से किसी भी तरह का हटाव श्रमिकों के कानूनी संरक्षण पर असर डाल सकता है।
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