1946 की हिंसा पर राज्यपाल आरएन रवि का बयान, बोले- ‘दर्दनाक अतीत छिपाना नहीं चाहिए’
कोलकाता। 1946 के डायरेक्ट एक्शन डे के दौरान कोलकाता में हुई हिंसा को लेकर पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आरएन रवि के बयान के बाद इतिहास और राजनीति पर बहस तेज हो गई है। रवि ने इस घटना को केवल दो समुदायों के बीच हुआ सांप्रदायिक संघर्ष मानने से इनकार करते हुए इसे भारतीय सभ्यता पर हमला बताया।
कोलकाता में आयोजित एक कार्यक्रम में राज्यपाल ने कहा कि 16 से 19 अगस्त 1946 के बीच हुई हिंसा को उसके व्यापक ऐतिहासिक संदर्भ में समझने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम लीग की ओर से पाकिस्तान की मांग के समर्थन में ‘डायरेक्ट एक्शन’ का आह्वान किए जाने के बाद कोलकाता में हिंसा भड़क उठी थी।
रवि ने उस दौरान हिंदुओं के खिलाफ व्यवस्थित हिंसा का आरोप लगाते हुए बड़ी संख्या में लोगों के मारे जाने का दावा किया। उन्होंने अलग-अलग अनुमानों का हवाला देते हुए मृतकों की संख्या 10 हजार से अधिक बताई और तत्कालीन बंगाल सरकार तथा मुख्यमंत्री हुसैन शहीद सुहरावर्दी की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
राज्यपाल ने कहा कि 1946 की घटना को सिर्फ सांप्रदायिक दंगे के तौर पर देखना इसके ऐतिहासिक महत्व को सीमित कर देता है। उनके मुताबिक, इस घटना को भारत के विभाजन से पहले की राजनीतिक परिस्थितियों और उस समय की सामाजिक स्थिति के संदर्भ में समझना जरूरी है।
उन्होंने यह भी कहा कि देश की नई पीढ़ी को इतिहास के कठिन और दर्दनाक अध्यायों की जानकारी होनी चाहिए। रवि ने चीन में नई पीढ़ी को उसके इतिहास के ‘अपमान के एक सदी’ वाले दौर के बारे में पढ़ाए जाने का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत को भी अपने अतीत के दर्दनाक हिस्सों को छिपाना नहीं चाहिए।
डायरेक्ट एक्शन डे 16 अगस्त 1946 को मुस्लिम लीग के आह्वान पर मनाया गया था। इसके बाद कलकत्ता में बड़े पैमाने पर हिंसा हुई, जिसे इतिहास में ‘ग्रेट कलकत्ता किलिंग’ के नाम से भी जाना जाता है। इस हिंसा में हजारों लोगों की मौत हुई और बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए।
1946 की इस घटना की व्याख्या और इसके लिए जिम्मेदार परिस्थितियों को लेकर इतिहासकारों के बीच अलग-अलग मत रहे हैं। ऐसे में राज्यपाल आरएन रवि के ताजा बयान ने एक बार फिर इस ऐतिहासिक घटना, विभाजन की राजनीति और इतिहास लेखन को लेकर बहस को सामने ला दिया है।
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