कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर फिर संकट, 10 जगह धंसी सड़क; जलभराव से दो लेन प्रभावित
कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर बारिश के बाद सड़क धंसने की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। रविवार को हुई बारिश के दौरान एक्सप्रेसवे पर करीब 10 जगह सड़क धंसने की सूचना सामने आई, जबकि कई स्थानों पर पानी निकासी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण जलभराव की स्थिति बन गई। इसके चलते वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा और कुछ हिस्सों में यातायात को डायवर्ट कर मरम्मत का काम कराना पड़ा।
नवनिर्मित 63 किलोमीटर लंबे कानपुर-लखनऊ एलिवेटेड एक्सप्रेसवे (एनई-6) का 13 जुलाई को रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोकार्पण किया था। निर्माण के दौरान अत्याधुनिक तकनीक के इस्तेमाल और बेहतर यातायात सुविधा के दावे किए गए थे। हालांकि, निर्माण के कुछ ही समय बाद पहली बारिश में सड़क धंसने की शिकायतें सामने आने लगीं।
स्थिति अब यह है कि एक स्थान पर मरम्मत का काम पूरा होने से पहले ही दूसरे हिस्से में सड़क धंसने लग रही है। रविवार को भी एक्सप्रेसवे पर युद्धस्तर पर मरम्मत का काम जारी रहा। किलोमीटर 39.7 पर डायवर्जन लगाकर सड़क की मरम्मत की गई, जबकि किलोमीटर 32.6 और 49.8 पर तौरा के पास भी मरम्मत कार्य कराया गया।
वहीं, लखनऊ-कानपुर लेन पर किलोमीटर 64 के पास दो दिन पहले उखड़ी सड़क की मरम्मत शुरू नहीं हो सकी। ऐसे में इस हिस्से से गुजरने वाले वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का खतरा बना हुआ है।
एक्सप्रेसवे पर समस्या केवल सड़क धंसने तक सीमित नहीं है। अचलगंज क्षेत्र में सुरक्षा के लिए लगाई गई किनारे की जालियां भी कई स्थानों पर टूट गई हैं। कुछ टूटी हुई जालियां नीचे जमा पानी में पड़ी दिखाई दीं, जिससे मवेशियों के एक्सप्रेसवे तक पहुंचने का खतरा बढ़ गया है।
बारिश के बाद एक्सप्रेसवे पर जलभराव की स्थिति ने पानी निकासी की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। गौरतलब है कि इससे एक दिन पहले ही भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की केंद्रीय टीम के तकनीकी सदस्य ने एक्सप्रेसवे के ड्रेनेज सिस्टम पर सवाल उठाए थे। लगातार सामने आ रही सड़क धंसने और जलभराव की घटनाओं ने एक्सप्रेसवे के निर्माण की गुणवत्ता और जल निकासी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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