समुद्र के बाद जमीन पर भी रॉकेट की सफल वापसी, क्या स्पेसएक्स को चुनौती देने की तैयारी में चीन?
बीजिंग। चीन ने पुन: उपयोग किए जा सकने वाले रॉकेट विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। सरकारी मीडिया के अनुसार, चीन ने पहली बार झूछ्वे-3 (Zhuque-3) रॉकेट के पहले चरण को जमीन पर सफलतापूर्वक वापस उतार लिया है। इससे पहले जुलाई में चीन रॉकेट के पहले हिस्से को समुद्र में बने प्लेटफॉर्म पर सफलतापूर्वक उतारने में कामयाब रहा था।
चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, बुधवार सुबह झूछ्वे-3 रॉकेट का परीक्षण किया गया, जिसके बाद उसके पहले चरण को सुरक्षित रूप से जमीन पर उतार लिया गया। इस उपलब्धि को चीन के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक अहम कदम माना जा रहा है।
रॉकेट के पहले चरण को वापस हासिल करने की यह चीन की दूसरी सफलता है। जुलाई में उसने समुद्र में बने एक प्लेटफॉर्म पर रॉकेट के हिस्से को सफलतापूर्वक उतारा था, जबकि अब पहली बार जमीन पर यह तकनीक सफल रही है।
पुन: उपयोग योग्य रॉकेट तकनीक का सबसे बड़ा फायदा अंतरिक्ष अभियानों की लागत को कम करना है। रॉकेट के जिन हिस्सों को पहले एक बार इस्तेमाल के बाद नष्ट या छोड़ दिया जाता था, उन्हें दोबारा उपयोग में लाकर उपग्रह प्रक्षेपण और अन्य अंतरिक्ष मिशनों का खर्च काफी घटाया जा सकता है।
अमेरिका में एलन मस्क की कंपनी SpaceX और जेफ बेजोस की Blue Origin वर्ष 2015 से रॉकेटों की सफल वापसी और पुन: उपयोग की तकनीक पर काम कर रही हैं। इसी तकनीक ने अंतरिक्ष उद्योग में बड़ी लागत बचत और मिशनों की संख्या बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की यह सफलता केवल तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि वैश्विक अंतरिक्ष प्रतिस्पर्धा में उसकी बढ़ती महत्वाकांक्षाओं का भी संकेत है। यदि चीन पुन: उपयोग योग्य रॉकेट तकनीक को पूरी तरह विकसित कर लेता है, तो वह भविष्य में उपग्रह प्रक्षेपण और व्यावसायिक अंतरिक्ष सेवाओं के क्षेत्र में अमेरिकी कंपनियों को कड़ी चुनौती दे सकता है।
हालांकि, स्पेसएक्स को इस क्षेत्र में अभी भी लंबा अनुभव और बड़ी बढ़त हासिल है। ऐसे में आने वाले वर्षों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि चीन इस तकनीक को कितनी तेजी से व्यावसायिक स्तर तक पहुंचा पाता है और वैश्विक अंतरिक्ष बाजार में अपनी हिस्सेदारी कैसे बढ़ाता है।
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