सुप्रीम कोर्ट ने निर्माण श्रमिकों की सुरक्षा पर मांगा जवाब, गुरुग्राम हादसे की जांच और मुआवजे की भी मांग
नई दिल्ली। निर्माण श्रमिकों की व्यावसायिक सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, हरियाणा सरकार समेत अन्य संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। जनहित याचिका में निर्माण स्थलों पर श्रमिकों की सुरक्षा के लिए स्पष्ट मानक तय करने के साथ गुरुग्राम में हुए हादसे की स्वतंत्र जांच और पीड़ितों को मुआवजा देने की मांग की गई है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए हरियाणा सरकार समेत संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया। याचिका में 2020 की व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य परिस्थितियां संहिता के तहत निर्माण श्रमिकों के लिए सुरक्षा मानक तय करने की मांग की गई है।
याचिकाकर्ता नेशनल कैंपेन कमेटी फॉर सेंट्रल लेजिस्लेशन ऑन कंस्ट्रक्शन लेबर की ओर से अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि निर्माण श्रमिकों की व्यावसायिक सुरक्षा से जुड़ा अहम मुद्दा याचिका में उठाया गया है। भूषण के मुताबिक, 2020 की ओएसएच संहिता में निर्माण स्थलों पर श्रमिकों की सुरक्षा से जुड़े सभी पहलुओं को पर्याप्त रूप से संबोधित नहीं किया गया है।
उन्होंने अदालत को बताया कि निर्माण स्थल पर दुर्घटना के बाद आमतौर पर एफआईआर दर्ज की जाती है, लेकिन श्रमिकों को कितना मुआवजा दिया जाना चाहिए, इसे तय करने के लिए प्रभावी व्यवस्था का अभाव है।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने कहा कि यह ऐसा क्षेत्र नहीं है जहां कोई कानून मौजूद ही नहीं है। उन्होंने कहा कि मौजूदा कानूनों की जांच की जा सकती है और यदि उनमें कोई कमी है तो उसे अदालत के सामने रखा जा सकता है। वहीं, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सुझाव दिया कि याचिका में टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग को भी पक्षकार बनाया जा सकता है।
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