शिमला: टनल निर्माण से सात से ज्यादा भवनों में आईं दरारें, प्रशासन की टीम ने मौके पर पहुंचकर लिया जायजा
शिमला। राजधानी शिमला के शांति विहार वार्ड के समिट्री से सटे रिहायशी इलाके में टनल निर्माण के चलते सात से ज्यादा भवनों में दरारें आने का मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों के अनुसार फर्श और दीवारों में आई दरारें लगातार बढ़ रही हैं, जिससे लोगों में चिंता और आक्रोश है।
शनिवार को एडीएम प्रोटोकॉल ज्ञान सागर नेगी और एसडीएम मंजीत शर्मा की अगुवाई में जिला प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और प्रभावित भवनों का निरीक्षण कर नुकसान का जायजा लिया। स्थानीय लोगों ने प्रशासन के सामने अपनी चिंताएं रखीं। उनका कहना है कि जीवनभर की कमाई से बनाए गए मकानों पर अब टनल निर्माण के कारण खतरा पैदा हो गया है।
नगर निगम शिमला के पूर्व महापौर संजय चौहान ने कहा कि फोरलेन निर्माण कंपनी की ओर से टनल निर्माण से पहले स्थानीय निवासियों से बातचीत नहीं की गई। उन्होंने दावा किया कि करीब 250 से 300 भवनों के नीचे से टनल गुजर रही है। उन्होंने कहा कि प्रभावित लोगों को तत्काल मुआवजा दिया जाना चाहिए और निर्माण कार्य के कारण पैदा हो रही स्थिति की गंभीरता से जांच होनी चाहिए।
टनल निर्माण के कारण इलाके में कितनी कंपन पैदा हो रही है, इसकी जांच के लिए एनएचएआई ने मौके पर उपकरण लगाए हैं। साथ ही क्षेत्र के भवनों की वीडियोग्राफी भी कराई जा रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि रिहायशी इलाके के ठीक नीचे फोरलेन टनलों का निर्माण किया जा रहा है और रात के समय ब्लास्टिंग के जरिए खुदाई की जा रही है। उनका कहना है कि इसी वजह से मकानों में दरारें आई हैं।
स्थानीय लोग पार्षद विनीत शर्मा की अगुवाई में महापौर सुरेंद्र चौहान से भी मिले और इलाके का निरीक्षण कराने तथा टनल निर्माण रोकने की मांग की। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त अनुपम कश्यप से मुलाकात कर अपनी शिकायत रखी।
पार्षद विनीत शर्मा ने कहा कि भट्ठाकुफर से चलौंठी के लिए फोरलेन की दो टनलों का निर्माण किया जा रहा है और अब यह काम रिहायशी इलाके के ठीक नीचे पहुंच गया है। स्थानीय लोगों की मांग है कि जब तक क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने और लोगों की आशंकाओं को दूर करने के लिए आवश्यक कदम नहीं उठाए जाते, तब तक टनल निर्माण पर रोक लगाई जाए।
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