‘कानून से ऊपर कोई नहीं’: राहुल गांधी के बयान पर भाजपा का पलटवार, सीजेपी नेताओं की गिरफ्तारी को बताया कानून के तहत कार्रवाई
नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराकर प्रदर्शन करने वाले युवाओं को जेल भेजे जाने की आलोचना की थी। इसके जवाब में भाजपा ने कहा कि संविधान शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का अधिकार देता है, लेकिन कानून तोड़ने की अनुमति नहीं देता।
राहुल गांधी ने सीजेपी नेताओं के खिलाफ हुई कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले युवाओं के साथ अन्याय बताया था। उन्होंने तिरंगा फहराने के लिए युवाओं को जेल भेजे जाने पर आपत्ति जताई और कार्रवाई की आलोचना की।
वहीं, भाजपा ने राहुल गांधी के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि देश में कानून सभी के लिए समान है और किसी को भी कानून से ऊपर नहीं माना जा सकता। पार्टी का तर्क है कि विरोध प्रदर्शन का अधिकार संवैधानिक है, लेकिन इसका इस्तेमाल करते समय निर्धारित कानूनी नियमों का पालन करना भी जरूरी है।
दरअसल, जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाए जाने के बाद सीजेपी के कार्यकर्ता वहां तिरंगा लेकर पहुंचे थे। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश और पुलिस के काम में बाधा डालने सहित नियमों के उल्लंघन के आरोप लगे। इसके बाद सौरव दास और आशुतोष रांका को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद सामने आए हैं। कांग्रेस ने इसे विरोध के अधिकार से जोड़कर सवाल उठाए हैं, जबकि भाजपा ने कानून और व्यवस्था का हवाला देते हुए कार्रवाई का बचाव किया है।
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