मानसून सत्र: राज्यसभा में पास हुआ बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल, 135 साल पुराना कानून होगा इतिहास
राज्यसभा में सोमवार को बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल ध्वनिमत से पारित हो गया। हालांकि, बिल पर चर्चा के दौरान विपक्षी सदस्यों ने सदन से वॉकआउट किया। इस बिल का उद्देश्य 135 साल पुराने बैंकर्स बुक्स एविडेंस एक्ट, 1891 की जगह लेना है। नए कानून के जरिए वित्तीय सबूतों से जुड़े कानूनी प्रावधानों को मौजूदा डिजिटल बैंकिंग व्यवस्था के अनुरूप बनाया जाएगा।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बिल की जरूरत बताते हुए कहा कि 1891 में बनाया गया कानून उस समय की बैंकिंग व्यवस्था को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था, जब बैंकिंग रिकॉर्ड मुख्य रूप से कागजी रूप में रखे जाते थे। इसका उद्देश्य कानूनी कार्यवाही के दौरान बैंक रिकॉर्ड की प्रमाणित प्रतियों को सबूत के तौर पर स्वीकार करने की अनुमति देना था, ताकि बैंक अधिकारियों को अदालत में मूल लेजर पेश करने की आवश्यकता न पड़े।
डिजिटल बैंकिंग के विस्तार के साथ बैंकिंग रिकॉर्ड तैयार करने और सुरक्षित रखने के तरीके भी बदल गए हैं। वित्त मंत्री ने कहा कि नया कानून आधुनिक तकनीक के अनुरूप बैंकिंग रिकॉर्ड को कानूनी मान्यता देने के साथ डेटा की गोपनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।
बिल पेश किए जाने के दौरान विपक्षी सदस्यों ने नारेबाजी की। उपसभापति ने विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे से कहा कि यदि वह अपनी बात बिल तक सीमित रखते हैं, तो उन्हें 1952 के नियमों के तहत बोलने की अनुमति दी जाएगी। इसके बाद सदन में तीखी बहस हुई।
इसके बाद उपसभापति ने सभी सदस्यों से बिल के विषय तक ही अपनी बात सीमित रखने का अनुरोध किया। चर्चा में मोहम्मद नदीमुल हक, अरुण सिंह, मानस रंजन मंगराज, एस. निरंजन रेड्डी, राजेंद्र हीरालाल जैन, भाष्यम रामा कृष्णा, रवि चंद्र वद्दिराजू, एल.के. सुधीश, डॉ. एम. धनपाल और डॉ. ज्योति नागनाथ वाघमारे समेत कई सदस्यों ने हिस्सा लिया।
बिल पर चर्चा करने वाले सदस्यों ने लंबे समय से लंबित इस कानूनी बदलाव का स्वागत किया। सदस्यों ने नए कानून के तहत बैंकिंग डेटा की गोपनीयता, सुरक्षा और डिजिटल रिकॉर्ड की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने की जरूरत पर भी जोर दिया।
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