ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती, टीएमसी के मूल नाम और चुनाव चिह्न की बहाली की मांग
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने पार्टी के नाम और मूल चुनाव चिह्न को लेकर चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। उन्होंने आयोग के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसके तहत तृणमूल कांग्रेस के मूल नाम और चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है।
शुक्रवार को चुनाव आयोग ने छह अक्तूबर को होने वाले विधानसभा उपचुनाव के लिए ममता बनर्जी के गुट को अंतरिम तौर पर ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न आवंटित किया। हालांकि, ममता बनर्जी ने इस व्यवस्था को समझौते के तौर पर स्वीकार करने से इनकार कर दिया है और पार्टी की मूल पहचान तथा पुराने चुनाव चिह्न की बहाली की मांग की है।
ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के फैसले को असंवैधानिक, गैरकानूनी, अलोकतांत्रिक और पूरी तरह पक्षपातपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि जब चुनाव प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी, नामांकन दाखिल किए जा चुके थे और उम्मीदवार अपने चुनाव चिह्न जमा कर चुके थे, तब पार्टी के नाम और मूल चुनाव चिह्न पर रोक लगाने का फैसला क्यों लिया गया, यह समझ से परे है।
ममता ने कहा कि वह इस फैसले के खिलाफ राजनीतिक, लोकतांत्रिक और कानूनी तरीके से लड़ाई जारी रखेंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह राजनीतिक दबाव के आगे पीछे नहीं हटेंगी। उनका कहना है कि तृणमूल कांग्रेस की पहचान केवल उसके नाम और चुनाव चिह्न तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वर्षों के संघर्ष और पार्टी कार्यकर्ताओं से जुड़ी हुई है।
ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस के साथ अपने 29 साल के राजनीतिक सफर का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि लंबे संघर्ष, त्याग और राजनीतिक लड़ाइयों के बाद उन्होंने इस पार्टी का निर्माण किया है और वह ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस को छोड़ नहीं सकतीं। उन्होंने कहा कि जब तक वह जीवित हैं, पार्टी उनके जीवन और उसके कार्यकर्ताओं का हिस्सा रहेगी।
ममता बनर्जी ने दोहराया कि वह पार्टी की मूल पहचान और पुराने चुनाव चिह्न को वापस हासिल करने के लिए कानूनी लड़ाई जारी रखेंगी। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल चुनौती के बाद अब चुनाव आयोग के फैसले को लेकर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)