जेएनयू के हॉस्टलों के बदतर हालात, डाइनिंग हॉल में रहने को मजबूर छात्र; जर्जर इमारतों और खराब व्यवस्था से सुरक्षा पर सवाल
नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के कई हॉस्टलों में छात्रों को रहने की पर्याप्त जगह नहीं मिल पा रही है। माही-मांडवी और ताप्ती जैसे हॉस्टलों में अव्यवस्था के साथ भवनों की खराब स्थिति भी छात्रों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा रही है। माही-मांडवी हॉस्टल में डाइनिंग हॉल को ही डॉरमेट्री में बदल दिया गया है, जहां फोल्डिंग बेड लगाए गए हैं। किचन के हिस्से में भी बिस्तर लगाए जाने की बात सामने आई है।
डाइनिंग हॉल में रहने वाले छात्रों ने मच्छरदानी लगा रखी है और कपड़े सुखाने के लिए तार बांधे गए हैं। यहां वाटर कूलर खराब होने और पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था नहीं होने की भी शिकायत है। एक छात्र के अनुसार, कमरों में जगह की कमी के कारण तीन-तीन छात्र फर्श पर गद्दे बिछाकर रहने को मजबूर हैं। गलियारों में कपड़े सुखाए जाते हैं और कई जगह कूड़ेदान भी भरे पड़े हैं।
ताप्ती हॉस्टल में खुले बिजली के बॉक्स सुरक्षा के लिए खतरा बने हुए हैं। गलियारे में दरवाजे का शीशा टूटा हुआ है। कुछ दिन पहले ताप्ती हॉस्टल के एक कमरे में पंखा गिरने की घटना भी सामने आई थी। इसके अलावा हॉस्टलों की दीवारों से प्लास्टर झड़ने और लोहे के सरिये दिखाई देने की स्थिति भी सामने आई है।
जेएनयू के विभिन्न हॉस्टलों की निर्धारित क्षमता अलग-अलग है। ब्रह्मपुत्रा हॉस्टल की क्षमता 386, चंद्रभागा की 204, गंगा की 342, गोदावरी की 344, झेलम की 307, कावेरी की 343, कोयना की 544, लोहित की 303 और माही-मांडवी हॉस्टल की क्षमता 349 छात्रों की है।
हॉस्टलों में जगह की कमी, रखरखाव की समस्या और सुरक्षा संबंधी खामियों के बीच छात्रों को बेहतर आवास और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की जरूरत सामने आ रही है।
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