‘फॉर्म-6 में किए गैरकानूनी बदलाव’: जयराम रमेश ने ज्ञानेश कुमार पर लगाए आरोप, सुप्रीम कोर्ट से की कार्रवाई की मांग
नई दिल्ली। मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में किए गए कथित बदलाव को लेकर विवाद बढ़ गया है। कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि फॉर्म-6 में बिना उचित प्रक्रिया के बदलाव किए गए। उनका कहना है कि इससे पहली बार मतदान करने वाले युवाओं के लिए मतदाता पंजीकरण की प्रक्रिया मुश्किल हो सकती है।
मामला उस बदलाव से जुड़ा है, जिसमें नए मतदाताओं से पिछले विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की मतदाता सूची में उनके, माता-पिता या दादा-दादी के नाम से संबंधित जानकारी मांगी गई। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयोग के दो अन्य आयुक्तों ने इस बदलाव पर आपत्ति दर्ज कराई थी और इसे हटाने की मांग की थी।
जयराम रमेश ने इसी मुद्दे को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त से जवाबदेही तय करने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि फॉर्म-6 में बदलाव करने की प्रक्रिया कानूनी प्रावधानों के अनुरूप नहीं थी। उनके मुताबिक, पहली बार मतदाता बनने वाले युवाओं को ऐसी जानकारी देने के लिए कहना, जो उनके अपने मतदाता रिकॉर्ड से सीधे संबंधित नहीं है, पंजीकरण प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।
इस विवाद के बीच चुनाव आयोग की ओर से यह पक्ष भी सामने आया है कि फॉर्म-6 में कोई औपचारिक बदलाव नहीं किया गया है। आयोग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, एसआईआर के तहत अतिरिक्त घोषणा पत्र की व्यवस्था की गई थी और संबंधित आदेशों को आयोग के सभी तीनों सदस्यों की मंजूरी मिली थी
मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंच गया है। 25 सितंबर को दायर एक याचिका में फॉर्म-6 में कथित बदलाव को रद्द करने और पुराने वैधानिक फॉर्म को बहाल करने की मांग की गई है। याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कथित वैधानिक उल्लंघनों की जांच और विशेष जांच दल गठित करने की मांग भी की गई है।
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग के भीतर अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना कुछ फैसले लिए गए। वहीं, चुनाव आयोग का पक्ष है कि एसआईआर से जुड़े फैसले सभी चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए थे। ऐसे में फॉर्म-6 में बदलाव और उससे जुड़ी प्रक्रिया को लेकर दोनों पक्षों के दावों के बीच अब कानूनी और संवैधानिक सवाल उठ रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में मूल फॉर्म-6 को बहाल करने के साथ-साथ चुनावी आंकड़ों और एसआईआर प्रक्रिया से जुड़े मामलों की स्वतंत्र जांच की मांग भी की गई है। अब इस मामले में आगे की कार्रवाई और अदालत के रुख पर नजर रहेगी।
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