मथुरा में सैकड़ों किन्नर, विभागीय रिकॉर्ड में सिर्फ 23 प्रमाणपत्रधारी
मथुरा। शहर में शादी-विवाह समारोहों, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और बाजारों में नेग मांगने को लेकर होने वाले विवादों के बीच समाज कल्याण विभाग के आंकड़े चर्चा में हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जिले में विभागीय रिकॉर्ड में केवल 23 किन्नरों के प्रमाणपत्र दर्ज हैं, जबकि शहर के विभिन्न इलाकों में किन्नर समुदाय के नाम पर नेग मांगने वालों की संख्या सैकड़ों में बताई जा रही है। ऐसे में पहचान, प्रमाणपत्र और विभागीय रिकॉर्ड के अद्यतन होने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
शहर के प्रमुख चौराहों, बाजारों और सार्वजनिक स्थानों के अलावा शादी-विवाह समारोहों में भी नेग मांगने वाले लोग नजर आते हैं। कई बार अलग-अलग समूहों के बीच क्षेत्र को लेकर विवाद की स्थिति बन जाती है। ऐसे मामलों में संबंधित लोगों की पहचान और उनके दावों के सत्यापन की व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं। हालांकि, केवल प्रमाणपत्रों की संख्या के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि प्रमाणपत्र के बिना मौजूद हर व्यक्ति की पहचान संदिग्ध है।
पहचान और सत्यापन की व्यवस्था पर जोर
किन्नर समुदाय के नाम पर नेग मांगने वालों की संख्या और विभागीय रिकॉर्ड के बीच बताए जा रहे अंतर को देखते हुए आधिकारिक आंकड़ों की समीक्षा और उन्हें अद्यतन करने की जरूरत है। प्रशासन और संबंधित विभागों को स्पष्ट करना चाहिए कि जिले में कितने पहचान प्रमाणपत्र जारी हुए हैं, कितने आवेदन लंबित हैं और समुदाय के सदस्यों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए क्या व्यवस्था है। साथ ही, नेग मांगने को लेकर होने वाले विवादों की शिकायतों पर निष्पक्ष तरीके से कार्रवाई की जानी चाहिए।
ट्रांसजेंडर पहचान प्रमाणपत्र और पहचान पत्र जारी करने के लिए केंद्र सरकार का राष्ट्रीय पोर्टल उपलब्ध है। सरकारी व्यवस्था का उद्देश्य समुदाय के लोगों को पहचान के साथ-साथ स्वास्थ्य, कौशल विकास और अन्य कल्याणकारी सुविधाओं तक पहुंच उपलब्ध कराना है। इसलिए प्रमाणपत्रों से जुड़े आंकड़ों की स्पष्टता के साथ समुदाय के अधिकारों और सम्मान की रक्षा भी जरूरी है।
स्थानीय स्तर पर कुछ लोगों के बारे में यह दावा किया जाता है कि वे आर्थिक कारणों से किन्नर समुदाय की पहचान अपनाकर नेग मांगते हैं और इसी वजह से समूहों के बीच विवाद होते हैं। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। किसी व्यक्ति की लैंगिक पहचान या उसके शरीर की बनावट के आधार पर उसे फर्जी घोषित करना उचित नहीं होगा। यदि नेग मांगने के दौरान जबरन वसूली, धमकी या मारपीट की शिकायत मिलती है, तो उसकी जांच तथ्यों और कानून के आधार पर की जानी चाहिए।
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