चीन को कितनी बार क्लीन चिट देंगे? खरगे ने पीएम मोदी से पूछे तीन सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भारत-चीन संबंधों और केंद्र सरकार की चीन नीति को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को विपक्ष पर हमला करने के बजाय देश को सीमा सुरक्षा, चीन के साथ बढ़ते व्यापार घाटे और कूटनीतिक वार्ताओं के परिणामों के बारे में स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए। खरगे ने सोशल मीडिया पर तीन प्रमुख मुद्दे उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा।
खरगे ने अरुणाचल प्रदेश में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच लगातार हो रहे आमने-सामने के घटनाक्रमों पर चिंता जताई। उन्होंने भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर के उस बयान का हवाला दिया, जिसमें अरुणाचल प्रदेश के कई स्थानों पर चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के साथ टकराव जारी रहने की बात कही गई थी। खरगे ने सवाल किया कि क्या भारत की गश्त करने की पहुंच प्रभावित हुई है और सीमा पर वास्तविक स्थिति के बारे में देश को पूरी जानकारी क्यों नहीं दी जा रही है।
उन्होंने अगस्त में अरुणाचल प्रदेश के तक्सिंग क्षेत्र के पास चीनी सैनिकों की कथित गतिविधियों और उसके बाद हुई सैन्य स्तर की बातचीत का भी जिक्र किया। खरगे ने पूछा कि डोकलाम और गलवान घाटी में हुए घटनाक्रमों के बाद क्या सीमा पर एक बार फिर गंभीर तनाव की स्थिति बन रही है। हालांकि, सीमा क्षेत्र में चीनी गतिविधियों को लेकर सामने आई कुछ रिपोर्टों पर पहले भारतीय रक्षा अधिकारियों ने अपुष्ट होने की बात कही थी। ऐसे में सीमा पर वास्तविक स्थिति और गश्त की व्यवस्था को लेकर सरकार की आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने चीन के साथ बढ़ते व्यापार घाटे को लेकर भी सरकार को घेरा। उनके अनुसार, वित्त वर्ष 2020-21 के बाद चीन से भारत का आयात 102 प्रतिशत बढ़ा है, जबकि दोनों देशों के बीच व्यापार घाटा बढ़कर 112.16 अरब डॉलर हो गया है। खरगे ने सवाल उठाया कि जब सरकार ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भरता पर जोर देती है, तब चीन से आयात पर निर्भरता क्यों बढ़ रही है। उन्होंने चीनी निवेश से जुड़े प्रतिबंधों में संभावित ढील और पात्र कंपनियों को उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन देने के मुद्दे पर भी स्पष्टीकरण मांगा।
खरगे का तीसरा सवाल भारत और चीन के बीच हुई कूटनीतिक वार्ताओं के नतीजों से जुड़ा था। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई मुलाकातों, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार स्तर की बातचीत तथा सीमा मामलों पर दोनों देशों के बीच हुई बैठकों का उल्लेख करते हुए पूछा कि इन प्रयासों से भारत को क्या ठोस लाभ मिला है। उन्होंने विशेष रूप से सवाल किया कि क्या मई 2020 से पहले भारत को हासिल गश्त के अधिकार पूरी तरह बहाल हो गए हैं।
खरगे ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में जवाबदेही जरूरी है और प्रधानमंत्री को संसद तथा देश को विश्वास में लेना चाहिए। उन्होंने सशस्त्र बलों पर भरोसा जताते हुए सरकार से सीमा की स्थिति और चीन के साथ वार्ताओं के परिणामों पर स्पष्ट जानकारी देने की मांग की।
भारत और चीन ने सीमा पर तनाव कम करने तथा संवाद बनाए रखने के लिए सैन्य और कूटनीतिक माध्यमों से बातचीत जारी रखी है। वहीं, कांग्रेस सीमा सुरक्षा और व्यापार संबंधों को लेकर सरकार से जवाब मांग रही है। सीमा पर मौजूदा स्थिति, गश्त की पहुंच और व्यापार घाटे से जुड़े सवालों पर सरकार का पक्ष इस बहस का महत्वपूर्ण पहलू बना हुआ है।
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