टेक कंपनियां नफरत से कमा रहीं मुनाफा, हिंदू-विरोधी गतिविधियों पर अमेरिकी सांसद ने उठाए सवाल
वॉशिंगटन। अमेरिका में सोशल मीडिया पर भारतीयों, दक्षिण एशियाई समुदायों और हिंदुओं के खिलाफ बढ़ती नफरत को लेकर सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने बड़ी टेक कंपनियों पर ऑनलाइन नफरत फैलने से लाभ कमाने का आरोप लगाते हुए कहा कि ऐसी कंपनियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। उन्होंने अमेरिकी प्रशासन और कानून प्रवर्तन एजेंसियों से भी इस समस्या पर प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।
कृष्णमूर्ति की यह चिंता इलिनॉय के ऑरोरा स्थित श्री वेंकटेश्वर स्वामी (बालाजी) हिंदू मंदिर के बाहर 11 अक्टूबर को हुई कथित हमले की कोशिश के बाद सामने आई है। अभियोजकों के अनुसार, मंदिर के बाहर एक व्यक्ति को निशाना बनाने की कोशिश की गई थी, लेकिन हथियार में खराबी आने से घटना टल गई। इस मामले में 19 वर्षीय आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। जांचकर्ताओं ने आरोपी पर नस्लवादी और श्वेत वर्चस्ववादी विचारधारा से जुड़े होने के आरोप भी लगाए हैं।
इस मामले को लेकर कृष्णमूर्ति ने एफबीआई निदेशक काश पटेल को पत्र लिखने में 105 सांसदों का नेतृत्व किया। सांसदों ने एफबीआई से यह स्पष्ट करने को कहा कि मामले की जांच संभावित संघीय घृणा-अपराध के रूप में की जा रही है या नहीं। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या जांच में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए धमकियां देने, संभावित हमले की योजना बनाने या किसी अन्य व्यक्ति से मदद लेने की भूमिका की पड़ताल की जा रही है।
कृष्णमूर्ति ने सोशल मीडिया पर बढ़ती नफरत को वास्तविक दुनिया में हिंसा के खतरे से जोड़ते हुए कहा कि ऑनलाइन फैलने वाली कट्टरपंथी सामग्री लोगों को प्रभावित कर सकती है। उनके मुताबिक, टेक कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म पर नफरत और हिंसा को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों पर निगरानी रखने और जवाबदेही स्वीकार करने की जरूरत है।
सितंबर 2026 में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2025 से जून 2026 के बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दक्षिण एशियाई समुदाय को निशाना बनाने वाली लगभग 5.42 लाख नफरत भरी पोस्ट की पहचान की गई। रिपोर्ट में जनवरी 2024 से जून 2026 के बीच ऐसी पोस्ट की मासिक संख्या में करीब 240 प्रतिशत वृद्धि दर्ज होने की बात कही गई। ये आंकड़े ऑनलाइन नस्लीय और धार्मिक नफरत को लेकर बढ़ती चिंता को रेखांकित करते हैं।
सांसदों ने एफबीआई से भारतीय-अमेरिकी, हिंदू-अमेरिकी, सिख और अन्य दक्षिण एशियाई समुदायों के खिलाफ विश्वसनीय ऑनलाइन धमकियों का आकलन करने तथा संभावित खतरे की जानकारी स्थानीय पुलिस और धार्मिक स्थलों तक पहुंचाने के उपायों पर भी जवाब मांगा है। उन्होंने इस संबंध में 29 अक्टूबर तक लिखित जवाब देने का अनुरोध किया है।
कृष्णमूर्ति ने जोर दिया कि किसी भी व्यक्ति को उसकी धार्मिक आस्था, पहचान या मूल के कारण निशाना बनाए जाने का डर नहीं होना चाहिए। उनका कहना है कि ऑनलाइन नफरत पर लगाम लगाने, संभावित हिंसा को रोकने और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकारी एजेंसियों, सोशल मीडिया कंपनियों और समाज को मिलकर काम करना होगा।
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