हिमाचल मौसम: छह दिन बारिश के आसार, 67 सड़कें बाधित; मानसून में 296 लोगों की मौत
शिमला। हिमाचल प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का दौर लगातार जारी है। मौसम विभाग ने प्रदेश के कई भागों में आगामी छह दिनों तक बारिश का सिलसिला जारी रहने का अनुमान जताया है। बारिश के कारण राज्य में जनजीवन प्रभावित हुआ है और कई स्थानों पर सड़कें बाधित हुई हैं। शनिवार तक प्रदेश में 67 सड़कें बंद होने की जानकारी सामने आई है।
बीते 24 घंटों के दौरान धर्मशाला में 87.2 मिलीमीटर, कांगड़ा में 68.8, कुफरी में 64.6, शिलारू में 54.6, जोगिंद्रनगर में 48, मालरांव में 45, पालमपुर में 40, स्लापड़ में 27.8, सराहन में 27.3, नगरोटा सूरियां में 25.8, कोटखाई में 24.2, श्री नयना देवी में 22.2 और शिमला में 18 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। राजधानी शिमला में शनिवार सुबह धूप खिली, लेकिन दोपहर बाद बारिश शुरू हो गई। वहीं ऊना जिले के कई क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ हुई बारिश से लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिली।
रामपुर बुशहर उपमंडल की फांचा पंचायत में नंती और फांचा कंडे के बीच वन विभाग की भूमि पर भारी भूस्खलन हुआ है। भूस्खलन की चपेट में आने से करीब 50 पेड़ गिर गए, जिससे वन संपदा को नुकसान पहुंचा है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह घटना करीब तीन दिन पहले हुई थी, जिसका वीडियो अब सामने आया है।
फांचा पंचायत के उपप्रधान सुभाष नेगी के अनुसार, इस क्षेत्र में पिछले कई वर्षों से बरसात के दौरान छोटे स्तर पर भूस्खलन होता रहा है, लेकिन इस बार जंगल का बड़ा हिस्सा इसकी चपेट में आ गया। उन्होंने वन विभाग से मांग की है कि भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र में सुरक्षा के आवश्यक उपाय किए जाएं, ताकि भविष्य में जंगल को और नुकसान होने से बचाया जा सके।
इस मानसून सीजन में 30 जून से 11 सितंबर तक प्रदेश में आपदा से संबंधित घटनाओं में 296 लोगों की मौत हुई है, जबकि 520 लोग घायल हुए हैं। मृतकों में 177 लोगों की जान सड़क हादसों में गई है। इस अवधि में 40 पक्के और 89 कच्चे मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं, जबकि 499 पक्के-कच्चे मकानों को आंशिक नुकसान पहुंचा है।
इसके अलावा प्रदेश में 17 दुकानों और 470 गोशालाओं को भी नुकसान हुआ है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस मानसून सीजन में हिमाचल प्रदेश में आपदा से हुए नुकसान का आंकड़ा 1,66,196.72 लाख रुपये तक पहुंच गया है। लगातार बारिश और भूस्खलन के बीच प्रशासन तथा संबंधित विभागों के सामने प्रभावित क्षेत्रों में यातायात और जनजीवन सामान्य बनाए रखना बड़ी चुनौती बनी हुई है।
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