यूसुफ पठान को गुजरात हाईकोर्ट से झटका, सरकारी जमीन से जुड़ी याचिका खारिज
अहमदाबाद। गुजरात हाईकोर्ट ने पूर्व भारतीय क्रिकेटर और तृणमूल कांग्रेस सांसद यूसुफ पठान की सरकारी जमीन से जुड़े मामले में दायर याचिका सोमवार को खारिज कर दी। पठान के वकील ने अदालत से याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी थी, जिसके बाद मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल और न्यायमूर्ति डीएन रे की खंडपीठ ने इसे वापस लेने के आधार पर खारिज कर दिया।
यह याचिका पिछले साल अगस्त में एकल पीठ के उस आदेश के खिलाफ दायर की गई थी, जिसमें वडोदरा में सरकारी जमीन पर यूसुफ पठान को कथित अतिक्रमणकारी बताया गया था। मामला वडोदरा नगर निगम की करीब 978 वर्ग मीटर जमीन से जुड़ा है।
पठान ने जमीन आवंटित करने की मांग की थी
यूसुफ पठान ने राज्य सरकार की नीति के तहत वडोदरा नगर निगम की जमीन उन्हें आवंटित करने का अनुरोध किया था। हालांकि, सरकार ने उनके अनुरोध को स्वीकार नहीं किया था। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया।
सोमवार की सुनवाई में पठान के वकील शालीन मेहता ने कहा कि राज्य सरकार की नीति के तहत उनके मुवक्किल के दावे पर अभी विचार किया जा रहा है। उन्होंने अदालत को बताया कि वीएमसी के जवाब का इंतजार किया जा रहा है, लेकिन नगर निकाय की ओर से अब तक कोई जानकारी नहीं मिली है।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों के लिए जमीन देने की नीति का हवाला
पठान के वकील ने अदालत में एक सरकारी परिपत्र का भी हवाला दिया। उनका कहना था कि इस नीति के तहत अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों को भूखंड आवंटित किए जा सकते हैं। चूंकि वीएमसी की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला है, इसलिए फिलहाल याचिका वापस लेने का फैसला किया गया है।
पहले हाईकोर्ट ने दी थी समय सीमा
इस मामले की पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पठान को जमीन खाली करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया था। अदालत ने यह भी चेतावनी दी थी कि यदि जमीन खाली करने में और देरी हुई तो उन पर अधिक हर्जाना लगाया जा सकता है।
अब याचिका वापस लिए जाने के बाद मामला फिलहाल अदालत में आगे नहीं बढ़ेगा। पठान के वकील ने कहा कि यदि नगर निगम और सरकार के स्तर पर मामला सुलझ जाता है तो ठीक है, अन्यथा आगे कानूनी विकल्पों पर विचार किया जाएगा।
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