यूपी के सभी 75 जिलों में साइबर थाने, हर मंडल में फॉरेंसिक लैब बनाने की तैयारी
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि प्रदेश के सभी 75 जिलों में साइबर थाने स्थापित किए जा चुके हैं और अब हर मंडल में फॉरेंसिक लैब स्थापित करने की दिशा में काम आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने साइबर सुरक्षा, वैज्ञानिक जांच और आधुनिक तकनीक को मजबूत बनाने पर जोर देते हुए कहा कि इन प्रयासों से अपराधों की जांच को प्रभावी बनाने के साथ युवाओं के लिए शिक्षा, अनुसंधान और रोजगार के नए अवसर भी विकसित होंगे।
मुख्यमंत्री शनिवार को लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस में आयोजित ‘टेकसंगम 2026’ को लेकर अपनी बात रख रहे थे। इस आयोजन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), साइबर फॉरेंसिक, क्वांटम तकनीक और डेटा सुरक्षा जैसे उभरते क्षेत्रों पर चर्चा होनी है। इसका उद्देश्य तकनीकी नवाचार को नागरिक सुरक्षा, न्याय व्यवस्था और डिजिटल भरोसे से जोड़ना है।
2017 के बाद साइबर और फॉरेंसिक ढांचे के विस्तार का दावा
योगी आदित्यनाथ के मुताबिक, वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में केवल दो साइबर थाने और चार फॉरेंसिक लैब थीं। उन्होंने कहा कि इसके बाद साइबर सुरक्षा और फॉरेंसिक जांच से जुड़े बुनियादी ढांचे को बढ़ाने पर काम किया गया। अब सभी जिलों में साइबर थाने स्थापित हैं और प्रत्येक मंडल में फॉरेंसिक लैब विकसित करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अपराधों की जांच में वैज्ञानिक साक्ष्यों और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल महत्वपूर्ण है। इससे साइबर अपराध जैसी नई चुनौतियों से निपटने और न्यायिक प्रक्रिया में डिजिटल साक्ष्यों की विश्वसनीयता मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
युवाओं के लिए खुलेंगे नए अवसर
मुख्यमंत्री के अनुसार, फॉरेंसिक विज्ञान और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में बढ़ती जरूरतों के चलते प्रशिक्षित विशेषज्ञों की मांग भी बढ़ रही है। ऐसे में युवाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, तकनीकी प्रशिक्षण, अनुसंधान और रोजगार के अवसर विकसित करने पर ध्यान दिया जा रहा है।
टेकसंगम 2026 में वैज्ञानिकों, तकनीकी विशेषज्ञों, नीति-निर्माताओं, विधि विशेषज्ञों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के बीच संवाद होगा। इसमें डिजिटल साक्ष्यों की विश्वसनीयता, डेटा संरक्षण और नई तकनीकों के जिम्मेदार इस्तेमाल जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। सरकार को उम्मीद है कि ऐसे प्रयासों से शोध संस्थानों, शिक्षण संस्थानों और उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ेगा तथा प्रदेश में तकनीकी क्षमता को मजबूती मिलेगी।
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