FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे बोले- ‘कार्य संस्कृति बदलनी होगी’, न दबाव में आता हूं, न दबाव डालता हूं
महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन के आयुक्त तुकाराम मुंढे मिलावटखोरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई को लेकर चर्चा में हैं। सिंथेटिक दूध, नकली पनीर और हानिकारक खाद्य सामग्री के खिलाफ एफडीए का अभियान जारी है। त्योहारी सीजन को देखते हुए जांच का दायरा छोटे दुकानदारों से लेकर बड़ी कंपनियों तक बढ़ाया जा रहा है।
तुकाराम मुंढे का कहना है कि एफडीए का उद्देश्य किसी का कारोबार बंद कराना नहीं, बल्कि नागरिकों के स्वास्थ्य की सुरक्षा करना है। उनके मुताबिक कार्रवाई किसी व्यक्ति या कंपनी को देखकर नहीं, बल्कि कानून, तथ्यों और नियमों के आधार पर होनी चाहिए।
मुंढे ने व्यवस्था में बदलाव पर जोर देते हुए कहा कि खाद्य सुरक्षा की पूरी व्यवस्था किसी एक सख्त अधिकारी पर निर्भर नहीं रहनी चाहिए। इसके लिए कामकाज में पारदर्शिता, ऑटोमेशन, सूचना प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की जरूरत है। अधिकारियों को उचित प्रशिक्षण देकर व्यवस्था को मजबूत किया जाना चाहिए।
बड़ी कंपनियां भी जांच के दायरे में
त्योहारी मौसम में खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने के साथ मिलावट की आशंका भी बढ़ जाती है। एफडीए की निगरानी अब पारंपरिक दुकानदारों और मिठाई विक्रेताओं के साथ-साथ ऑनलाइन और क्विक-कॉमर्स कंपनियों तक पहुंच रही है। अमेजॉन, जेप्टो और ब्लिंकिट जैसी कंपनियों के माध्यम से लोगों तक पहुंचने वाली खाद्य सामग्री भी जांच के दायरे में है।
मुंढे का कहना है कि नियम सभी के लिए समान होने चाहिए। उन्होंने साफ किया कि वह न किसी दबाव में आते हैं और न किसी पर दबाव डालते हैं। उनका जोर ऐसी कार्य संस्कृति विकसित करने पर है, जिसमें कानून के मुताबिक कार्रवाई हो और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
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