ममता पर भारी पड़ी दरिंदगी: गोविंदपुरी में जेठानी के सूने आंगन को महकाने वाले मासूम और मां की बेरहम हत्या
रिश्तों की डोर कितनी नाजुक और भावनाएं कितनी गहरी हो सकती हैं, इसकी एक दर्दनाक बानगी दक्षिणी दिल्ली के गोविंदपुरी इलाके में देखने को मिली। यहाँ गली नंबर-10 में हुए एक रोंगटे खड़े कर देने वाले दोहरे हत्याकांड ने न केवल दो जिंदगियां छीन लीं, बल्कि ममता और त्याग की एक खूबसूरत मिसाल को भी लहूलुहान कर दिया।
यह कहानी मंजू देवी की है, जिन्होंने कुछ समय पहले अपनी जेठानी शारदा के सूने आंगन को खुशियों से भरने के लिए एक ऐसा फैसला लिया था जो कोई भी मां बेहद भारी मन से लेती है। जेठानी की सूनी गोद देखकर मंजू का दिल पसीज गया था और उन्होंने अपने महज 11 दिन के कलेजे के टुकड़े, खुशहाल, को हमेशा के लिए उन्हें सौंप दिया था। उस वक्त मंजू ने अपने दिल पर पत्थर सिर्फ इसलिए रखा था ताकि उनके परिवार में किलकारियां गूंज सकें और खुशहाल को दो माताओं का भरपूर प्यार मिल सके।
किसे पता था कि जिस मासूम की एक मुस्कान और आवाज सुनने के लिए मंजू का दिल हमेशा बेचैन रहता था, उस मासूम की जिंदगी का सफर इतनी बेरहमी से खत्म कर दिया जाएगा। बृहस्पतिवार की सुबह इस हंसते-खेलते आशियाने पर काल बनकर टूटी। अज्ञात हमलावरों ने चाकू से गोदकर जेठानी शारदा और मासूम खुशहाल की बेरहमी से हत्या कर दी।
जब इस दोहरे हत्याकांड की खबर सामने आई, तो पूरे इलाके में सन्नाटा पसर गया। मौके पर पहुंची मंजू देवी जब अपनी जेठानी और खुद के पैदा किए उस जिगर के टुकड़े की खून से सनी लाशों के सामने आईं, तो उनका कलेजा फट गया। बदहवास मंजू अपनी सुध-बुध खोकर बस एक ही बात बार-बार दोहराए जा रही थीं कि जिस बच्चे को उन्होंने सिर्फ 11 दिन की उम्र में दूसरों की खुशियों के लिए अपनी गोद से अलग कर दिया था, आज उसी मासूम को इस हाल में देखना पड़ेगा, ऐसा उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था। यह गम अब ताउम्र एक मां के सीने में खंजर की तरह चुभता रहेगा। पुलिस ने इस पूरे मामले की तफ्तीश शुरू कर दी है, लेकिन इस खौफनाक वारदात ने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है।
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