गुना में 17 जून से ऐतिहासिक पंचमुखी पंचकल्याणक महोत्सव, छह दिन धर्ममय रहेगा शहर

Friday, June 12, 2026 - 22:34
Updated: 4 months ago
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गुना में 17 जून से ऐतिहासिक पंचमुखी पंचकल्याणक महोत्सव, छह दिन धर्ममय रहेगा शहर

गुना (आरएनआई) धर्मनगरी गुना में जैनाचार्य विद्यासागर जी महाराज के शिष्य मुनि पुंगव सुधासागर जी महाराज के सानिध्य में 17 जून से 22 जून तक ऐतिहासिक पंचमुखी पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का भव्य आयोजन होने जा रहा है। इस महामहोत्सव को लेकर सकल जैन समाज सहित संपूर्ण क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। प्रतिष्ठाचार्य बह्मचारी प्रदीप भैयाजी के निर्देशन में इस धार्मिक अनुष्ठान के दौरान प्रत्येक दिन जैन आगम के अनुसार विभिन्न मांगलिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक क्रियाएं संपन्न की जाएंगी। 

_*17 जून: ध्वजारोहण, घटयात्रा एवं गर्भकल्याणक पूर्वार्ध*_

महोत्सव के प्रथम दिन यानी 17 जून को ध्वजारोहण, मंगल घटयात्रा और गर्भकल्याणक पूर्वार्ध की क्रियाएं आयोजित होंगी। इस पावन दिवस की शुरुआत प्रात: 5:30 बजे से होगी, जिसमें मंगलाष्टक, दिग्वंदन, रक्षा मंत्र का पाठ किया जाएगा। इसके उपरांत भगवान का नित्यमह अभिषेक, शांतिधारा और विशेष पूजन संपन्न होगा। तत्पश्चात, नगर में भव्य एवं मंगल घटयात्रा निकाली जाएगी, जिसके बाद आयोजन स्थल पर मंत्रोच्चार के साथ मंगल ध्वजारोहण किया जाएगा। इसके तुरंत बाद मंडप उद्घाटन, मंडल शुद्धि और मंडल प्रतिष्ठा शुद्धि आदि की मांगलिक क्रियाएं की जाएंगी। प्रात: 8 बजे सभी श्रद्धालुओं को मुनिश्री के प्रवचन मिलेंगे। दोपहर के सत्र में 12 बजे से पुन: मांगलिक क्रियाएं प्रारंभ होंगी, जिसमें मंगलाष्टक, दिग्वंदन, रक्षा मंत्र और शांति मंत्र के पाठ के साथ पात्र शुद्धि, सकलीकरण, इंद्र प्रतिष्ठा और नांदी विधान संपन्न किया जाएगा। इसी कड़ी में आगे मंगल कलश स्थापना, शांतिकलश स्थापना, अखंड दीप स्थापना एवं विशेष पूजन के साथ भव्य याग मंडल विधान की क्रियाएं संपन्न होंगी। शाम के सत्र में 6:00 बजे श्रद्धालुओं की शंकाओं के निवारण के लिए जिज्ञासा समाधान कार्यक्रम होगा, जिसके बाद आचार्य भक्ति और देव-शास्त्र-गुरु की सामूहिक महाआरती आयोजित की जाएगी। रात्रि कालीन सत्र में 7:30 बजे से रंगमंच पर सौधर्म इंद्र की सभा और गहन तत्व चर्चा का मंचन होगा। इसी दौरान सौधर्म इंद्र का आसन कम्पायमान होना, धनपति कुबेर का भव्य आगमन, अयोध्या नगरी पर रत्न वृष्टि होना तथा सर्वतोभद्र और स्वस्तिक के पावन आधार पर अलौकिक अयोध्या नगरी की सुंदर रचना का दृश्य जीवंत किया जाएगा। इसके बाद अष्टकुमारियों द्वारा माता को भेंट समर्पण, देवियों द्वारा माता की अष्टयाम सेवा, तत्व चर्चा, माता द्वारा देखे गए सोलह स्वप्नों के दर्शन और मधुर संगीत-नृत्य के साथ गर्भ कल्याणक की अत्यंत महत्वपूर्ण आंतरिक क्रियाएं पूरी की जाएंगी।

_*18 जून: गर्भकल्याणक उत्तरार्द्ध और मांगलिक संस्कार*_

महोत्सव के दूसरे दिन 18 जून को गर्भकल्याणक उत्तरार्द्ध की क्रियाएं संपन्न होंगी। सुबह 5:30 बजे के सत्र में मंगलाष्टक, दिग्वंदन और रक्षा मंत्र के मंगल पाठ के साथ भगवान का नित्यमह अभिषेक और विश्व शांति की कामना से शांतिधारा की जाएगी। इसके बाद गर्भकल्याणक की विशेष पूजन और शांति हवन संपन्न होगा। प्रात: 8 बजे से मुनिश्री के प्रवचन होंगे। जिसमें वे गर्भकल्याणक के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालेंगे। दोपहर के सत्र में महिलाओं के विशेष कार्यक्रमों की श्रृंखला शुरू होगी, जिसमें दोपहर 1 बजे से सीमन्तनी क्रियाएं, महिलाओं द्वारा मांगलिक संगीत और माता की भव्य गोद भराई का कार्यक्रम अत्यंत उत्साह के साथ आयोजित किया जाएगा। इसके बाद दोपहर 2:30 बजे से सुरुचिपूर्ण सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां होंगी। दोपहर 3 बजे एक बार फिर मंगल घटयात्रा निकाली जाएगी, जिसके बाद नवनिर्मित जिन मंदिर की शुद्धि, जिन बेदी की शुद्धि, गगनचुंबी शिखर की शुद्धि और देव प्रतिमाओं का प्रतिष्ठा संस्कार आदि अत्यंत सूक्ष्मता के साथ किया जाएगा। शाम 6 बजे नियमित रूप से जिज्ञासा समाधान का सत्र होगा, जिसमें श्रद्धालु मुनि श्री के समक्ष अपनी जिज्ञासाएं रखेंगे, जिसके बाद आचार्य भक्ति और महाआरती की जाएगी। रात्रि 7:30 बजे से राजा नाभिराय के राजदरबार का भव्य दृश्य सजेगा, जिसमें सभासदों द्वारा गंभीर विषयों पर चर्चा, महाराज नाभिराय का राजसभा में गरिमामयी आगमन तथा प्रधानमंत्री एवं सेनापति से राज्य की सुरक्षा व व्यवस्था के संबंध में चर्चा की जाएगी। इसी दौरान माता मरुदेवी का सभा में मंगल आगमन होगा, जहाँ राजा और माता के बीच सोलह स्वप्नों की चर्चा और उनके अलौकिक फलादेश को रेखांकित किया जाएगा। इस पूरे दृश्य के दौरान छप्पन कुमारियों द्वारा माता को भेंट समर्पण, तत्व चर्चा और प्रश्नोत्तर के कार्यक्रम होंगे, जिन्हें आकर्षक बनाने के लिए एलईडी स्क्रीन पर सोलह स्वप्नों का जीवंत और सजीव चित्रण प्रस्तुत किया जाएगा। इसके साथ ही सौधर्म इंद्र की सभा, तत्व चर्चा, इंद्र का आसन कम्पायमान होना, कुबेर का आगमन, रत्न वृष्टि, अयोध्या नगरी की रचना और देवियों द्वारा माता की सेवा जैसी गर्भ कल्याणक की शेष आंतरिक क्रियाएं गीत-नृत्य के साथ दोहराई जाएंगी।

_*19 जून: अलौकिक जन्मकल्याणक एवं पांडुकशिला पर महाअभिषेक*_

तीसरा दिन यानी 19 जून तीर्थंकर बालक के जन्मकल्याणक का साक्षी बनेगा। प्रात: 5:30 बजे मंगलाष्टक, दिग्वंदन और रक्षा मंत्र पूर्वक नित्यमह अभिषेक तथा शांतिधारा पूजन किया जाएगा। इसके तुरंत बाद प्रात: 6:30 बजे वह पावन घड़ी आएगी जब तीर्थंकर बालक का जन्म होगा। बालक के जन्म लेते ही प्रतीकात्मक अयोध्या नगरी में चारों ओर बधाइयां बंटने लगेंगी और पूरा पंडाल भक्ति तथा आनंदमय नृत्य से सराबोर हो उठेगा। प्रात: 8:00 बजे सौधर्म इंद्र अपने पूरे राजसी ठाठ-बाठ के साथ अपने विशाल डेरे से दिव्य ऐरावत हाथी पर आरूढ़ होकर निकलेंगे और अयोध्या नगरी की तीन गगनभेदी परिक्रमा करेंगे। इसके बाद उनका अयोध्या नगरी में प्रवेश होगा, जहाँ कुबेर द्वारा रत्न वृष्टि की जाएगी। इसके पश्चात सौधर्म इंद्र एवं शचि इंद्राणी के बीच तीर्थंकर बालक की महिमा को लेकर सुंदर चर्चा होगी। तत्पश्चात, सौधर्म इंद्र तीर्थंकर बालक को अत्यंत विनयपूर्वक अपनी गोदी में लेकर ऐरावत हाथी पर आरूढ़ होंगे और विशाल देव-समुदाय के साथ पांडुकवन की ओर प्रस्थान करेंगे। प्रात: 8:30 बजे पूज्य मुनि श्री के मंगल प्रवचन (देशना) प्रारंभ होंगे और इसी के समानांतर नगर में एक ऐतिहासिक एवं भव्य जुलूस निकाला जाएगा। प्रात: 9 बजे पांडुकशिला पर सौधर्म इंद्र और अन्य देवों द्वारा 1008 मंगल कलशों की पवित्र धाराओं से तीर्थंकर बालक का महामस्तकाभिषेक (जन्माभिषेक) अत्यंत जयकारों के साथ किया जाएगा। शाम 6 बजे के सत्र में रोज़ की भांति जिज्ञासा समाधान, आचार्य भक्ति और देव-शास्त्र-गुरु की महाआरती उतारी जाएगी। रात्रि 7:30 बजे का समय सबसे आकर्षक होगा, जब सौधर्म इंद्र द्वारा तीर्थंकर बालक की भक्ति में लीन होकर अलौकिक तांडव नृत्य प्रस्तुत किया जाएगा। इसके बाद प्रभु को पालना झुलाने की रस्म और तीर्थंकर बालक की बाल क्रीड़ाओं का अत्यंत मनोहर और नयनाभिराम दृश्य रंगमंच पर सजीव किया जाएगा।

_*20 जून: तपकल्याणक, राज्याभिषेक एवं प्रभु का वैराग्य*_

महोत्सव के चतुर्थ दिन 20 जून को प्रभु के तपकल्याणक की क्रियाएं की जाएंगी। प्रात: 5:30 बजे मंगलाष्टक, दिग्वंदन और रक्षा मंत्र के साथ भगवान का नित्यमह अभिषेक, शांतिधारा पूजन तथा जन्म कल्याणक के उपलक्ष्य में विशेष पूजन एवं शांति हवन संपन्न होगा। प्रात: 8:30 बजे पंडाल में मुनि श्री सुधासागर जी महाराज के दिव्य और वैराग्यमय प्रवचन होंगे। इसके बाद दिन की सबसे महत्वपूर्ण क्रियाएं प्रात: 11:30 बजे से प्रारंभ होंगी, जिसमें मंगलाष्टक, दिग्वंदन, रक्षा मंत्र और शांतिमंत्र पूर्वक आदिकुमार (भगवान) के विवाह की रस्में पूरी की जाएंगी। विवाह के उपरांत उनका भव्य राज्याभिषेक किया जाएगा, जहाँ देश-विदेश से आए 32,000 मुकुटबद्ध राजाओं द्वारा प्रभु के चरणों में बहुमूल्य भेंट और उपहार समर्पित किए जाएंगे। राज्याभिषेक के बाद प्रभु द्वारा राज्य संचालन की सुंदर व्यवस्था दिखाई जाएगी, जिसमें वे प्रजा को आजीविका के लिए असी, मसी, कृषि, विद्या, शिल्प और वाणिज्य जैसी छह प्रमुख क्रियाओं का उपदेश (षट्कर्म उपदेश) देंगे और समाज को 72 कलाएं सिखाएंगे। इसी दौरान वे अपनी पुत्रियों ब्राह्मी और सुंदरी को अक्षरों और अंकों की शिक्षा प्रदान करेंगे तथा राज्य की सुचारू न्याय व्यवस्था के लिए दंड व्यवस्था का निर्धारण करेंगे। इसके बाद राजसभा में अप्सरा नीलांजना के अति सुंदर नृत्य का आयोजन होगा, जिसके बीच में ही नीलांजना की आयु समाप्त होने पर प्रभु आदिकुमार को संसार की असारता का बोध होगा और उन्हें परम वैराग्य की उत्पत्ति होगी। वैराग्य होने पर वे अपने पुत्रों भरत और बाहुबली को क्रमश: राज्य सौंपकर उदासीन भाव से सुदर्शन नामक दिव्य पालकी में आरूढ़ होंगे और दीक्षा स्थल की ओर प्रस्थान करेंगे, जहाँ विधि-विधान से दीक्षा विधि, अंकन्यास और जैनेश्वरी दीक्षा के संस्कार संपन्न किए जाएंगे। शाम 6 बजे जिज्ञासा समाधान, आचार्य भक्ति और महाआरती होगी तथा रात्रि 7:30 बजे वैराग्य के रंग में रंगे सुंदर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी जाएगी।

_*21 जून : ज्ञानकल्याणक, आहारचर्या एवं समवशरण की दिव्य रचना*_

महोत्सव के पांचवें दिन 21 जून को प्रभु के ज्ञानकल्याणक का उत्सव मनाया जाएगा। प्रात: 5:30 बजे मंगलाष्टक, दिग्वंदन और रक्षा मंत्र के पाठ के साथ नित्यमह अभिषेक और तपकल्याणक के उपलक्ष्य में विशेष पूजन तथा शांति हवन किया जाएगा। प्रात: 8 बजे मुनि श्री की ज्ञानमयी देशना होगी, जो आत्मा और परमात्मा के भेद को स्पष्ट करेगी। इसके बाद प्रात: 9 बजे वह पावन बेला आएगी जब वन में ध्यानरत महामुनिराज वृषभसागर जी महाराज शुद्ध आहारचर्या के लिए नगर की ओर प्रस्थान करेंगे और भाग्यशाली श्रावकों को उन्हें नवधा भक्ति पूर्वक आहार दान देने का महान अवसर प्राप्त होगा। प्रात: 11 बजे से ज्ञान कल्याणक की गूढ़ आंतरिक क्रियाएं प्रारंभ होंगी, जिसमें मंगलाष्टक, दिग्वंदन, रक्षा मंत्र और शांतिमंत्र पूर्वक श्री जी की पवित्र स्थापना की जाएगी। इसके बाद मंत्राराधना, अधिवासना, तिलकदान, मुखोदघाटन (प्रभु का मुख खोलना), नेत्रोनमीलन (नेत्र खोलना), मूर्तियों में प्राणप्रतिष्ठा करना, सूरीमंत्र प्रदान करना जैसी अति गोपनीय और महत्वपूर्ण क्रियाएं की जाएंगी। इसी पावन घड़ी में प्रभु को केवलज्ञान की उत्पत्ति होगी, जिसके हर्ष में देवों द्वारा आकाश में समवशरण की अलौकिक और वैभवशाली रचना की जाएगी। समवशरण में भगवान की दिव्यध्वनि खिरेगी, जिसके अंतर्गत तत्वचर्चा और ज्ञान कल्याणक की विशेष महापूजन का आयोजन किया जाएगा। शाम 6 बजे श्रद्धालु अपनी शंकाओं के समाधान के लिए जिज्ञासा समाधान सत्र में भाग लेंगे, जिसके बाद आचार्य भक्ति और महाआरती होगी। रात्रि 7:30 बजे ज्ञान कल्याणक की खुशी में समाज के कलाकारों द्वारा भक्तिपूर्ण सांस्कृतिक कार्यक्रमों की सुंदर प्रस्तुति दी जाएगी।

_*22 जून: मोक्ष कल्याणक, विश्व शांति महायज्ञ एवं ऐतिहासिक गजरथ फेरी*_

महोत्सव के अंतिम और छठे दिन 22 जून को मोक्ष कल्याणक की परम पावन क्रियाएं आयोजित होंगी। प्रात: 5:30 बजे मंगलाष्टक, दिग्वंदन और रक्षा मंत्र के पाठ के साथ भगवान का नित्यमह अभिषेक और शांतिधारा पूजन संपन्न किया जाएगा। इसके तुरंत बाद, नवप्रभात की प्रथम किरण के साथ आदिनाथ भगवान के कैलाश पर्वत से मोक्ष (निर्वाण) पधारने का दृश्य साकार होगा। प्रभु के मोक्ष जाते ही अग्निकुमार देवों का आगमन होगा, जो रत्नमयी कपूर से प्रभु के नख और केश आदि का विसर्जन (अग्नि संस्कार) करेंगे। इस वैराग्यमयी बेला के बाद पूज्य मुनि श्री की अंतिम और विशेष मंगल देशना होगी, जिसमें वे मोक्ष मार्ग की पूर्णता का संदेश देंगे। इसके पश्चात सभी इंद्र-इंद्राणियों और श्रावकों द्वारा मोक्षकल्याणक की विशेष पूजन की जाएगी और पूरे यज्ञ की पूर्णता के लिए विश्व शांति महायज्ञ में पवित्र आहुतियां दी जाएंगी। महायज्ञ की पूर्णाहुति के बाद जिनविंब स्थापना, नवनिर्मित मंदिर के शिखरों पर स्वर्ण कलशारोहण और गगनचुंबी ध्वजारोहण की मांगलिक क्रियाएं गाजे-बाजे के साथ पूरी की जाएंगी। इसके तुरंत बाद, प्रात: 8:30 बजे से इस पूरे महोत्सव का मुख्य आकर्षण यानी ऐतिहासिक गजरथ महोत्सव प्रारंभ होगा, जिसमें विशाल हाथियों द्वारा खींचे जाने वाले रथों की आयोजन स्थल की परिक्रमा करते हुए अत्यंत वैभव के साथ 7 फेरियां लगाई जाएंगी। गजरथ फेरी की पूर्णता के बाद मुनि श्री के मंगल आशीर्वचन होंगे, जिसके बाद आयोजन समिति द्वारा इस महामहोत्सव को सफल बनाने वाले सभी कार्यकर्ताओं, दानदाताओं और श्रेष्ठियों का आभार प्रदर्शन व भव्य सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा। शाम 6 बजे अंतिम बार जिज्ञासा समाधान का सत्र होगा, जिसके बाद भावपूर्ण आचार्य भक्ति और देव-शास्त्र-गुरु की विदाई महाआरती के साथ इस छह दिवसीय ऐतिहासिक पंचकल्याणक महोत्सव का सानंद समापन होगा।

_*नोट:- कार्यक्रमों में आंशिक बदलाव संभव है, जो अपडेट किया जाएगा*_

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