पश्चिमी विक्षोभ का असर, 18–20 मार्च के बीच कई राज्यों में गरज-चमक के साथ बारिश और ओलावृष्टि के आसार
नई दिल्ली (आरएनआई) उत्तर-पश्चिम भारत में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी और मैदानी इलाकों में गरज के साथ बारिश, तेज हवाएं और ओलावृष्टि देखने को मिल रही है। इसके चलते तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, 18 से 20 मार्च के बीच पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र और उससे सटे मैदानी इलाकों में मौसम और खराब हो सकता है। इस दौरान तेज हवाओं, बारिश और कुछ स्थानों पर ओले गिरने की संभावना जताई गई है। पिछले 24 घंटों में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड और पूर्वोत्तर के कई राज्यों में छिटपुट ओलावृष्टि दर्ज की गई।
उप-हिमालयी क्षेत्रों जैसे सिक्किम, असम और मेघालय में कुछ स्थानों पर भारी बारिश (7 से 20 सेमी) रिकॉर्ड की गई, जबकि अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम में भी अच्छी बारिश हुई। कोलकाता और मालदा में 50 से 65 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलीं।
जम्मू और कश्मीर में भारी बर्फबारी के बीच राहत एवं बचाव कार्य भी जारी हैं। किश्तवाड़ के सिंथन टॉप क्षेत्र में फंसे 235 लोगों और 38 वाहनों को सेना के व्हाइट नाइट कोर ने सुरक्षित बाहर निकाला। राहत के दौरान लोगों को भोजन, पानी और अस्थायी आश्रय भी उपलब्ध कराया गया।
उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी और निचले क्षेत्रों में बारिश से ठंड एक बार फिर लौट आई है। मुनस्यारी के खलिया टॉप, पंचाचूली और अन्य पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फ की सफेद चादर बिछ गई है, जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ है।
वहीं हिमाचल प्रदेश के लाहौल और मनाली-लेह मार्ग पर बर्फबारी के कारण फंसे करीब 10 हजार पर्यटकों और स्थानीय लोगों को रोहतांग टनल के रास्ते सुरक्षित निकाला गया। लगभग 1,500 वाहनों में फंसे लोगों को रातभर कड़ाके की ठंड का सामना करना पड़ा, जिसके बाद प्रशासन और बचाव टीमों ने राहत अभियान चलाकर उन्हें सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया।
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