भारत का तीन सूत्रीय युद्धविराम प्रस्ताव, रूस-यूक्रेन की सहमति पर नजर
नई दिल्ली। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को कम करने के लिए भारत ने तीन सूत्रीय युद्धविराम प्रस्ताव पेश किया है। इस पहल का उद्देश्य ऊर्जा ठिकानों और जरूरी बुनियादी ढांचे पर हमले रोकना, काला सागर के रास्ते अनाज और ऊर्जा की आपूर्ति जारी रखना तथा व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाने की घटनाओं पर रोक लगाना है। प्रस्ताव को लेकर दोनों देशों के रुख पर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नजर बनी हुई है।
भारत का यह प्रस्ताव विदेश मंत्री एस. जयशंकर की सितंबर में कीव यात्रा के दौरान यूक्रेनी नेतृत्व के सामने रखा गया था। इसके बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी पुष्टि की कि भारत रूस और यूक्रेन, दोनों के साथ युद्धविराम और तनाव कम करने के उपायों पर बातचीत कर रहा है। मंत्रालय के अनुसार, दोनों पक्षों ने भारत के शांति प्रयासों की सराहना की है, हालांकि इससे किसी समझौते पर सहमति बन जाने की पुष्टि नहीं होती।
प्रस्ताव के पहले हिस्से में ऊर्जा संयंत्रों और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हमले रोकने पर जोर है। दूसरे हिस्से का उद्देश्य काला सागर के बंदरगाहों से अनाज और ऊर्जा की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करना है। तीसरे हिस्से में व्यापारिक जहाजों पर हमले रोकने की बात कही गई है। इससे खाद्य और ऊर्जा आपूर्ति के साथ समुद्री व्यापार को होने वाले नुकसान को कम करने की उम्मीद है।
यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्रिय सिबिहा ने भारत के प्रस्ताव को व्यापक बताते हुए कहा था कि उनका देश अलग-अलग युद्धविराम विकल्पों पर विचार करने के लिए तैयार है। हालांकि, यूक्रेन ने ऊर्जा और बंदरगाहों के बुनियादी ढांचे के साथ काला सागर की सुरक्षा को भी समझौते में शामिल करने की जरूरत बताई है। रूस की ओर से इस विशिष्ट प्रस्ताव को औपचारिक रूप से स्वीकार किए जाने की पुष्टि नहीं हुई है।
भारत की पहल ऐसे समय में आई है, जब काला सागर में जहाजों पर हमलों और ऊर्जा आपूर्ति में बाधाओं को लेकर चिंता बढ़ी है। इन घटनाओं से भारतीय नाविकों की सुरक्षा भी प्रभावित हुई है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि प्रस्ताव के सभी बिंदुओं पर रूस और यूक्रेन सहमत होंगे या नहीं। किसी भी ठोस प्रगति के लिए दोनों पक्षों के बीच बातचीत और शर्तों पर सहमति जरूरी होगी।
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