ड्रोन बदल रहे आधुनिक युद्ध की तस्वीर, यूक्रेनी सैनिक का रेस्क्यू बना बड़ी मिसाल
आधुनिक युद्ध में ड्रोन और नई तकनीकों की भूमिका तेजी से बढ़ रही है। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने भी कहा है कि चीन की बढ़ती सैन्य क्षमताओं को देखते हुए पारंपरिक तरीकों से मुकाबला करना चुनौतीपूर्ण हो गया है। रूस-यूक्रेन युद्ध में सामने आए घटनाक्रम इस बदलाव को और स्पष्ट करते हैं, जहां निगरानी, आपूर्ति और घायल सैनिकों को सुरक्षित निकालने में ड्रोन अहम भूमिका निभा रहे हैं।
यूक्रेन के 49 वर्षीय सैनिक कोस्तियांतिन व्लासेंको की कहानी इसका एक उल्लेखनीय उदाहरण है। रिपोर्टों के मुताबिक, वह करीब आठ महीने तक एक क्षतिग्रस्त स्कूल में बॉयलर के नीचे बने छोटे से स्थान में रहे। रूसी ड्रोन हमले में उनके पैर गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उनके साथी सैनिक की मौत के बाद वह लंबे समय तक अकेले उस इलाके में फंसे रहे, जहां पारंपरिक वाहनों से पहुंचना बेहद जोखिम भरा था।
यूक्रेनी सैनिकों ने उन्हें निकालने के लिए पहले मानवरहित जमीनी वाहन भेजने की कोशिश की, लेकिन वे प्रयास सफल नहीं हुए। इसके बाद एक विशेष भारी-भरकम ड्रोन की मदद से बचाव अभियान तैयार किया गया। अक्टूबर की शुरुआत में ड्रोन के जरिए उन्हें जरूरी सामान, दवाइयां और निर्देशों वाला फोन पहुंचाया गया। 4 अक्टूबर को छह प्रोपेलर वाले ड्रोन की सहायता से उन्हें सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया गया। इस अभियान में अन्य मानवरहित प्रणालियों और सैन्य इकाइयों ने भी सहयोग किया।
व्लासेंको यूक्रेन के क्रिवी रिह के रहने वाले हैं और 30वीं मैकेनाइज्ड ब्रिगेड में तैनात थे। उनकी निकासी को ऐसे अभियान के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें पारंपरिक रास्तों से बचाव संभव नहीं होने पर नई तकनीक का इस्तेमाल किया गया। यह घटना दिखाती है कि ड्रोन अब केवल निगरानी या हमले तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कठिन परिस्थितियों में रसद पहुंचाने और जीवन बचाने में भी उपयोगी साबित हो रहे हैं।
भारत के संदर्भ में भी आधुनिक तकनीक और सीमा सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज है। आईटीबीपी प्रमुख शत्रुजीत सिंह कपूर ने हाल ही में कहा कि चीन की आधुनिक सैन्य क्षमताओं के मद्देनजर भारतीय बलों को अपने प्रशिक्षण, उपकरणों और कार्यप्रणाली को लगातार उन्नत करना होगा। ड्रोन और उन्हें रोकने वाली प्रणालियां इस बदलाव का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
हालांकि, भारत और चीन के बीच अगले वर्ष या 2036 तक युद्ध होने के दावे की कोई पुष्ट आधिकारिक पुष्टि नहीं है। ऐसे अनुमानों को निश्चित भविष्यवाणी की तरह प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा। रूस-यूक्रेन युद्ध से मिले अनुभव यह जरूर बताते हैं कि भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों के लिए तकनीकी तैयारी, बेहतर समन्वय और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप रणनीति महत्वपूर्ण होती जा रही है।
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