खरगे के बयान पर कांग्रेस में भी सवाल, पृथ्वीराज चव्हाण बोले- भाषा की मर्यादा जरूरी
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की विवादित टिप्पणी को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ता जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं की आलोचना के बीच अब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने भी खरगे के बयान पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल के नेता को भाषा की मर्यादा नहीं भूलनी चाहिए।
गुजरात के गोधरा में पत्रकारों से बातचीत के दौरान चव्हाण ने कहा कि अगर खरगे ने गलती से या किसी अन्य वजह से ऐसा बयान दिया है, तो उन्हें खुद इस पर सफाई देनी चाहिए। उन्होंने माना कि खरगे से गलती हुई है, लेकिन साथ ही भाजपा नेताओं के पुराने बयानों का भी उल्लेख किया। चव्हाण ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी राहुल गांधी को लेकर ऐसी टिप्पणियां की थीं, जिन्हें नहीं किया जाना चाहिए था। उनके मुताबिक, राजनीतिक मतभेदों के बावजूद सभी दलों के नेताओं को शालीन भाषा का इस्तेमाल करना चाहिए।
दरअसल, पटना में रविवार को आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान खरगे ने प्रधानमंत्री मोदी को लेकर टिप्पणी की थी। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं को लेकर बोलते समय उन्होंने कहा था कि इसमें शामिल लोगों को जेल भेजा जाएगा। इस दौरान श्रोताओं में से एक व्यक्ति ने प्रधानमंत्री मोदी के सत्ता में बने रहने की बात कही, जिसके जवाब में खरगे ने विवादित टिप्पणी कर दी।
खरगे के बयान के बाद भाजपा ने कांग्रेस अध्यक्ष की भाषा पर सवाल उठाते हुए उनकी आलोचना की। वहीं, कांग्रेस के कुछ नेताओं ने उनका बचाव करते हुए कहा कि बयान को उसके पूरे संदर्भ में देखा जाना चाहिए। इस विवाद के बीच चव्हाण की प्रतिक्रिया को कांग्रेस के भीतर से आई असहमति के रूप में देखा जा रहा है।
चव्हाण ने राजनीतिक संवाद के बदलते स्वरूप पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पहले संसद में नेताओं के बीच तीखी बहस होने के बावजूद व्यक्तिगत संबंध सामान्य बने रहते थे, लेकिन अब राजनीतिक विरोधियों के बीच कटुता बढ़ती दिखाई देती है। उनके मुताबिक, अलग-अलग विचारधाराओं का समर्थन करने वाले नेता एक-दूसरे के दुश्मन नहीं हैं, बल्कि अपने विचारों को आगे बढ़ाने का प्रयास करते हैं।
खरगे की टिप्पणी ने एक बार फिर राजनीतिक बहस में इस्तेमाल होने वाली भाषा और नेताओं की सार्वजनिक जिम्मेदारी को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। चव्हाण ने स्पष्ट किया कि शालीनता का पालन सभी राजनीतिक दलों को करना चाहिए और किसी भी पक्ष की अनुचित टिप्पणी को सही नहीं ठहराया जा सकता।
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