अमेरिकी चुनाव में चंदे का खेल: मस्क ने दिए 446 मिलियन डॉलर, जानिए रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स को कितना पैसा मिला

Tuesday, October 27, 2026 - 18:27
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अमेरिकी चुनाव में चंदे का खेल: मस्क ने दिए 446 मिलियन डॉलर, जानिए रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स को कितना पैसा मिला

वॉशिंगटन। अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव से पहले राजनीतिक चंदे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। चुनाव प्रचार पर अरबों डॉलर खर्च किए जा रहे हैं और अरबपति कारोबारी, बड़े वित्तीय समूह तथा राजनीतिक संगठन अपनी पसंद के उम्मीदवारों और पार्टियों का समर्थन कर रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 2026 के चुनावी चक्र में 50 सबसे बड़े दानदाताओं और संगठनों ने कुल 2.77 अरब डॉलर का योगदान दिया है। इनमें रिपब्लिकन समर्थक समूहों को सबसे अधिक धन मिला है।

रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स को कितना चंदा मिला?

आंकड़ों के अनुसार, 50 सबसे बड़े दानदाताओं और संगठनों में से रिपब्लिकन समर्थक समूहों को लगभग 1.67 अरब डॉलर मिले, जबकि डेमोक्रेटिक समर्थक समूहों को करीब 832 मिलियन डॉलर का योगदान मिला। शेष 264 मिलियन डॉलर ऐसे संगठनों और दानदाताओं से आए, जिन्हें दोनों दलों के समर्थन या विशेष हितों से जुड़ा माना गया है।

अमेरिकी चुनावी फंडिंग का दायरा इससे भी बड़ा है। संघीय चुनाव आयोग के अनुसार, जनवरी 2025 से जून 2026 के बीच कांग्रेस के उम्मीदवारों ने लगभग 2.8 अरब डॉलर जुटाए। राजनीतिक दलों की समितियों को करीब 1.4 अरब डॉलर मिले, जबकि राजनीतिक कार्रवाई समितियों यानी पीएसी ने 8.3 अरब डॉलर से अधिक की राशि जुटाई। इन आंकड़ों में अलग-अलग श्रेणियों के धन शामिल हैं, इसलिए इन्हें सीधे जोड़कर कुल चंदे का आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए।

कौन हैं सबसे बड़े दानदाता?

इस चुनावी चक्र में एलन मस्क सबसे बड़े व्यक्तिगत दानदाता के रूप में सामने आए हैं। संघीय चुनाव आयोग के आंकड़ों पर आधारित रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने रिपब्लिकन समर्थक संगठनों और राजनीतिक समूहों को लगभग 446 मिलियन डॉलर दिए हैं।

इसके बाद रिपब्लिकन समर्थक प्रमुख दानदाताओं में एलिजाबेथ और रिचर्ड उइहलीन का नाम है, जिन्होंने करीब 150 मिलियन डॉलर का योगदान दिया। जेफ और जेनिन यास ने लगभग 110 मिलियन डॉलर दिए हैं।

डेमोक्रेटिक समर्थक दानदाताओं में जॉर्ज सोरोस ने लगभग 102 मिलियन डॉलर, माइकल ब्लूमबर्ग ने 84 मिलियन डॉलर और लिंक्डइन के सह-संस्थापक रीड हॉफमैन तथा उनकी पत्नी मिशेल यी ने करीब 41 मिलियन डॉलर का योगदान दिया है।

राजनीतिक संगठनों में भी बड़ी रकम का लेन-देन हुआ है। रिपब्लिकन समर्थक संगठन वन नेशन को लगभग 133 मिलियन डॉलर मिले, जबकि डेमोक्रेटिक समर्थक मेजॉरिटी फॉरवर्ड को करीब 102 मिलियन डॉलर का योगदान मिला। क्रिप्टोकरेंसी से जुड़ी कंपनियां और अन्य कारोबारी समूह भी चुनावी फंडिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

क्या है सुपर पीएसी और फंडिंग का पूरा तंत्र?

अमेरिका में चुनावी चंदे की व्यवस्था भारत से अलग है। वहां उम्मीदवारों को सीधे दिए जाने वाले चंदे पर कानूनी सीमा लागू होती है। 2025-26 के संघीय चुनाव चक्र में कोई व्यक्ति किसी उम्मीदवार की चुनाव समिति को प्रति चुनाव अधिकतम 3,500 डॉलर दे सकता है।

हालांकि, सुपर पीएसी यानी सुपर पॉलिटिकल एक्शन कमेटी के जरिए बड़ी रकम खर्च की जा सकती है। ये संगठन उम्मीदवारों का समर्थन करने या उनके विरोध में विज्ञापन चलाने के लिए असीमित चंदा जुटा सकते हैं। लेकिन उन्हें उम्मीदवारों के अभियान से स्वतंत्र रूप से खर्च करना होता है; वे उम्मीदवारों को सीधे चंदा नहीं दे सकते।

इसके अलावा, कुछ गैर-लाभकारी संगठन राजनीतिक मुद्दों पर विज्ञापन और जनसंपर्क अभियान चलाते हैं। इनके जरिए धन का इस्तेमाल होने से यह पता लगाना कभी-कभी मुश्किल हो सकता है कि किसी अभियान के पीछे अंतिम आर्थिक समर्थक कौन है। यही वजह है कि अमेरिकी चुनावों में पारदर्शिता और बड़े दानदाताओं के प्रभाव को लेकर बहस होती रहती है।

चुनाव में पैसा क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

अमेरिका में चुनाव प्रचार के दौरान टेलीविजन और डिजिटल विज्ञापन, कर्मचारियों की नियुक्ति, मतदाताओं तक पहुंचने के अभियान, जनसभाओं और स्थानीय संगठनों पर भारी खर्च होता है। पर्याप्त फंडिंग से उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों को अधिक मतदाताओं तक पहुंचने में मदद मिलती है।

हालांकि, अधिक चंदा मिलने का मतलब चुनाव जीतना तय होना नहीं है। चुनावी नतीजों पर उम्मीदवारों की लोकप्रियता, स्थानीय मुद्दों, मतदाताओं की प्राथमिकताओं और मतदान में भागीदारी जैसे कई कारक असर डालते हैं। बड़े दानदाताओं की भूमिका पर बहस का मुख्य सवाल यह है कि क्या अत्यधिक धनवान लोगों और संगठनों का राजनीतिक प्रक्रिया पर जरूरत से ज्यादा प्रभाव पड़ सकता है।

अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में प्रतिनिधि सभा और सीनेट की सीटों के लिए मुकाबला होगा। इन चुनावों के नतीजे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शेष कार्यकाल में कांग्रेस के राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में चुनावी चंदे के आंकड़े यह समझने का एक महत्वपूर्ण आधार हैं कि राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के प्रचार अभियानों को आर्थिक समर्थन कहां से मिल रहा है।

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