डीयू में प्रदर्शनों पर रोक के आदेश पर हाईकोर्ट ने उठाए सवाल, डीयू और पुलिस से मांगा जवाब
नई दिल्ली (आरएनआई): दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय और दिल्ली पुलिस द्वारा जारी उस आदेश पर सवाल उठाए हैं, जिसमें विश्वविद्यालय परिसर में विरोध-प्रदर्शन, जुलूस और सभाओं पर प्रतिबंध लगाया गया था। अदालत ने कहा कि किसी भी परिस्थिति में पूर्ण (ब्लैंकेट) प्रतिबंध उचित नहीं ठहराया जा सकता।
सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि विरोध-प्रदर्शन और सभाओं पर पूरी तरह से रोक लगाने जैसी स्थिति स्वीकार्य नहीं है। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने पूछा कि यह आदेश कब से लागू है और इसकी आवश्यकता क्यों पड़ी। हालांकि अदालत ने इस आदेश पर तत्काल अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया, लेकिन इसे अगले 10 दिनों तक जारी रखने की अनुमति दी है।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने गुरुवार को इस मामले की सुनवाई की। यह याचिका डीयू लॉ फैकल्टी के छात्र उदय भदौरिया ने दायर की है, जिसमें 17 फरवरी 2026 को प्रॉक्टर कार्यालय द्वारा जारी अधिसूचना को चुनौती दी गई है।
अधिसूचना में विश्वविद्यालय परिसर और संबद्ध कॉलेजों में पांच या उससे अधिक लोगों की सभा, सार्वजनिक बैठकें, जुलूस, प्रदर्शन, धरना या किसी भी प्रकार के आंदोलन पर एक महीने के लिए प्रतिबंध लगाया गया था।
सुनवाई के दौरान अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि सार्वजनिक बैठकें, रैलियां, जुलूस और प्रदर्शन जैसे कार्यक्रमों में शांतिपूर्ण प्रदर्शन भी शामिल हैं, ऐसे में इन पर पूर्ण प्रतिबंध कैसे लगाया जा सकता है। अदालत ने यह भी पूछा कि यदि कानून-व्यवस्था से जुड़ी समस्या थी तो धारा 144 के तहत पुलिस कार्रवाई कर सकती थी, फिर विश्वविद्यालय को अलग से ऐसा आदेश जारी करने की क्या जरूरत थी।
पीठ ने यह भी कहा कि अनुच्छेद 19 के तहत नागरिकों को अभिव्यक्ति और शांतिपूर्ण सभा की स्वतंत्रता दी गई है, लेकिन इसका दुरुपयोग भी नहीं किया जा सकता। अदालत ने दिल्ली विश्वविद्यालय और दिल्ली पुलिस को एक सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 25 मार्च को होगी।
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