बांकेबिहारी मंदिर में सोने-चांदी के सिंहासनों की जांच, एक माह में देनी होगी रिपोर्ट
वृंदावन। उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के वृंदावन स्थित प्रसिद्ध श्रीबांकेबिहारी मंदिर में सोने-चांदी के सिंहासनों, झूलों, रथों और अन्य बहुमूल्य धार्मिक सामग्री के उपयोग को लेकर जांच तेज हो गई है। मंदिर की उच्चाधिकार प्राप्त प्रबंधन समिति ने जांच समिति को एक महीने के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
मामला मंदिर को श्रद्धालुओं की ओर से भेंट की गई बहुमूल्य धार्मिक सामग्री का विशेष पर्वों और उत्सवों पर उपयोग नहीं किए जाने से जुड़ा है। इसमें सोने-चांदी के झूले, रथ, शेषनाग से जुड़े आसन तथा अन्य सिंहासन शामिल हैं। विशेष रूप से जगन्नाथ रथयात्रा के अवसर पर चांदी के रथ और शेषनाग को ठाकुरजी के सिंहासन के पास स्थापित नहीं किए जाने के बाद सवाल उठे थे। इसके बाद प्रबंधन समिति ने मामले की जांच के लिए समिति गठित की।
जांच समिति के सदस्य और सेवायत हिमांशु गोस्वामी ने जांच की प्रक्रिया पर विरोध जताते हुए शिकायतों की प्रमाणिकता पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि मामले की पड़ताल के दौरान वर्ष 2002 से 2013 तक मंदिर प्रबंधन से जुड़े न्यायालयीन रिकॉर्ड भी देखे जाने चाहिए, ताकि पुराने प्रबंधन और धार्मिक परंपराओं से संबंधित तथ्यों की समीक्षा हो सके।
मंदिर में बहुमूल्य धार्मिक वस्तुओं के उपयोग को लेकर उठे सवाल ऐसे समय सामने आए हैं, जब मंदिर की व्यवस्थाओं, चढ़ावे और प्रबंधन को लेकर भी चर्चा चल रही है। इस मामले में समिति की जांच और उससे जुड़े दस्तावेजों की समीक्षा महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
फिलहाल, जांच समिति की रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि बहुमूल्य धार्मिक सामग्री के उपयोग और उससे जुड़े प्रबंधन के संबंध में क्या निष्कर्ष निकलते हैं।
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