तमिलनाडु विधानसभा में भ्रष्टाचार की फाइलों को लेकर घमासान, मुख्यमंत्री विजय और स्टालिन आमने-सामने
तमिलनाडु विधानसभा में शुक्रवार को भ्रष्टाचार से जुड़ी कथित तीन फाइलों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। विपक्ष की ओर से मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से इन फाइलों को सार्वजनिक करने और कार्रवाई की मांग की गई।
विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि उनकी मेज पर रखी तीनों फाइलें किस मामले से जुड़ी हैं और सरकार इन पर कार्रवाई करने से क्यों पीछे हट रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपनी पिछली बात पर कायम रहने और फाइलों से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की। बहस के दौरान उदयनिधि की कुछ टिप्पणियों को विधानसभा अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर ने कार्यवाही के रिकॉर्ड से हटा दिया।
सत्ता पक्ष ने आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि सरकार के पास संबंधित मामलों के पर्याप्त सबूत मौजूद हैं और उचित समय पर कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी। विधानसभा अध्यक्ष ने भी मुख्यमंत्री का बचाव करते हुए कहा कि सरकार फैसले अधिकारियों के साथ औपचारिक विचार-विमर्श के बाद लेती है।
विधायकों को सरकारी वाहन देने पर भी विवाद
विधानसभा में विधायकों को सरकारी वाहन उपलब्ध कराने के प्रस्ताव पर भी सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने रहे। उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि डीएमके के सभी 59 विधायक सरकारी वाहन नहीं लेंगे। उन्होंने राज्य की आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए सुझाव दिया कि ऐसी सुविधा जरूरतमंद विधायकों तक सीमित रहनी चाहिए।
वहीं सत्ता पक्ष ने सरकारी वाहनों की सुविधा का बचाव करते हुए इसे जनप्रतिनिधियों के कामकाज और तय प्रोटोकॉल का हिस्सा बताया।
लाइव प्रसारण को लेकर भी बहस
विधानसभा की कार्यवाही के लाइव प्रसारण को लेकर भी सदन में बहस हुई। उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि सीधे प्रसारण के कारण सदन की कार्यवाही सोशल मीडिया पर एडिटेड क्लिप और रील्स के रूप में प्रसारित हो रही है, जिससे विधानसभा की गरिमा प्रभावित हो सकती है।
सत्ता पक्ष ने लाइव प्रसारण को पारदर्शिता से जोड़ते हुए कहा कि जनता को सरकार और विधानसभा की कार्यवाही देखने का अधिकार है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद भ्रष्टाचार से जुड़ी कथित तीन फाइलों को लेकर राजनीतिक विवाद और बढ़ने के संकेत हैं।
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