सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: बुजुर्गों की संपत्ति से बच्चों को निकालने का ट्रिब्यूनल को अधिकार
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों को लेकर अहम कानूनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि जरूरत पड़ने पर संबंधित ट्रिब्यूनल बुजुर्ग की संपत्ति से उसके बच्चों को बेदखल करने का आदेश दे सकता है। अदालत ने माना कि यह अधिकार वरिष्ठ नागरिक के भरण-पोषण, सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने कहा कि माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 के तहत गठित ट्रिब्यूनल के पास वरिष्ठ नागरिक की संपत्ति से उसके बच्चों को बाहर करने का अधिकार है, यदि ऐसा करना उसकी देखभाल और सुरक्षा के लिए आवश्यक हो।
सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें ट्रिब्यूनल द्वारा जारी बेदखली के आदेश को पलट दिया गया था। ट्रिब्यूनल ने एक वरिष्ठ नागरिक की संपत्ति से उसके बेटे और बहू को बाहर करने का निर्देश दिया था।
क्या है पूरा मामला?
मामला लखनऊ के विकास नगर स्थित एक आवासीय मकान से जुड़ा है। संपत्ति के मालिक रवि कांत गुप्ता ने अपने बेटे को घर से बेदखल करने के लिए 5 जून 2022 को 2007 के अधिनियम के तहत जिलाधिकारी के सामने आवेदन किया था।
मामले में यह भी सामने आया कि गुप्ता की 81 वर्षीय मां को कथित तौर पर घर छोड़कर वृद्धाश्रम में रहने के लिए मजबूर होना पड़ा था। इसके बाद संपत्ति और परिवार से जुड़े विवाद को लेकर कानूनी प्रक्रिया शुरू हुई।
हाईकोर्ट ने पहले बेटे और बहू को घर से निकालने के आदेश को रद्द कर दिया था। इसके खिलाफ मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां शीर्ष अदालत ने ट्रिब्यूनल के अधिकार को बरकरार रखते हुए हाईकोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से यह स्पष्ट हुआ है कि वरिष्ठ नागरिकों की संपत्ति और उनके कल्याण से जुड़े मामलों में 2007 के कानून के तहत गठित ट्रिब्यूनल केवल भरण-पोषण तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरत पड़ने पर उनकी सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए संपत्ति से बच्चों को बाहर करने का आदेश भी दे सकता है।
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