फर्जी बीमा दावों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, सभी राज्यों में एसआईटी बनाने का आदेश; एक ही वाहन को कई हादसों में दिखाने की होगी जांच
फर्जी बीमा दावों के मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने सभी राज्यों को ऐसे मामलों की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि सुनवाई के दौरान बड़े पैमाने पर बीमा धोखाधड़ी के संकेत मिले हैं, जिनकी देशभर में जांच जरूरी है।
जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ एक ऐसे मामले की सुनवाई कर रही थी, जो शुरुआत में दुर्घटना में शामिल एक वाहन की पहचान से जुड़ा था। सुनवाई के दौरान सामने आए तथ्यों से कथित तौर पर फर्जी बीमा दावों का व्यापक नेटवर्क होने के संकेत मिले। इसके बाद कोर्ट ने मामले का दायरा बढ़ाते हुए देशभर में ऐसे दावों की जांच का निर्देश दिया।
एक ही वाहन को कई दुर्घटनाओं में दिखाने का आरोप
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फर्जी बीमा दावे दाखिल किए जा रहे हैं और कुछ मामलों में उन्हें मंजूरी भी मिल रही है। एक ही वाहन को अलग-अलग दुर्घटनाओं में शामिल दिखाकर बीमा राशि हासिल करने जैसे मामलों की भी जांच की जाएगी।
बीमा कंपनियों को एसआईटी को जानकारी देने का निर्देश
पीठ ने निर्देश दिया कि बीमा कंपनियों की जिम्मेदारी होगी कि वे सामने आने वाले सभी संदिग्ध और धोखाधड़ी वाले दावों को संबंधित राज्य की एसआईटी के पास भेजें। कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि किसी राज्य की एसआईटी को मामलों की जानकारी देने में भेदभाव या जानबूझकर चूक पाई गई, तो संबंधित बीमा कंपनी के शीर्ष प्रबंधन को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।
असली ग्राहकों पर भी पड़ता है असर
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फर्जी बीमा दावों से केवल बीमा कंपनियों को आर्थिक नुकसान नहीं होता, बल्कि इसका असर ईमानदार ग्राहकों पर भी पड़ सकता है। धोखाधड़ी के कारण बीमा कंपनियों का खर्च बढ़ता है और अंततः इसका बोझ ग्राहकों पर अधिक प्रीमियम के रूप में पड़ सकता है।
अदालत के निर्देश के बाद अब राज्यों में गठित होने वाली एसआईटी फर्जी दावों के मामलों की जांच करेंगी और बीमा कंपनियों से प्राप्त संदिग्ध मामलों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेंगी।
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