एसआईआर विवाद: अथिरा विजयन से कथित मारपीट के मामले में जीरो एफआईआर दर्ज, सुप्रीम कोर्ट में मेट्रो प्रतिबंधों पर भी हलफनामा
नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरोध में दिल्ली में हुए प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में राजनीतिक और कानूनी हलचल तेज हो गई है। एनएसयूआई कार्यकर्ता अथिरा विजयन के साथ कथित मारपीट के मामले में दिल्ली पुलिस ने गुरुवार, 15 अक्टूबर को जीरो एफआईआर दर्ज की है। यह घटना 13 अक्टूबर को कनॉट प्लेस में हुए प्रदर्शन से जुड़ी बताई जा रही है।
अथिरा विजयन ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों को बस से लाकर सड़क पर उतारा गया और उनके साथ मारपीट की गई। उन्होंने कपड़े फाड़ने की कोशिश किए जाने का आरोप भी लगाया है। दर्ज जीरो एफआईआर में फिलहाल किसी आरोपी का नाम नहीं है। मामले की जांच संबंधित पुलिस थाने को सौंपी जाएगी। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

इससे पहले एनएसयूआई ने भी महिला कार्यकर्ताओं के साथ कथित दुर्व्यवहार को लेकर विरोध जताया था। संगठन ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। दिल्ली में एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने के बाद पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों के अधिकारों को लेकर भी सवाल उठे हैं।

इसी बीच दिल्ली मेट्रो पर लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है। यह मामला 10 अक्टूबर के प्रदर्शनों के दौरान मेट्रो सेवाओं और प्रवेश-निकास पर लगाए गए प्रतिबंधों से जुड़ा है। अदालत ने पहले निर्देश दिया था कि मेट्रो और रेल सेवाओं पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया जाना चाहिए तथा आम लोगों की आवाजाही प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने अदालत में कहा है कि मेट्रो सेवाएं पूरी तरह बंद नहीं की गई थीं। उसके अनुसार, 303 में से 45 स्टेशनों पर प्रवेश और निकास को सीमित किया गया था, जबकि अधिकांश नेटवर्क चालू रहा। मेट्रो प्रशासन ने यह भी कहा कि प्रतिबंध कानून-व्यवस्था से जुड़ी एजेंसियों के आकलन और निर्देशों के आधार पर लगाए गए थे। इस मामले में अदालत के निर्देशों के पालन और प्रतिबंधों की आवश्यकता पर कानूनी विचार जारी है।

दूसरी ओर, एसआईआर और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर विपक्ष की याचिका भी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए निर्धारित है। विपक्ष ने मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए जांच और पारदर्शिता की मांग की है।
इस राजनीतिक विवाद के बीच अमेरिकी गायिका मैरी मिलबेन ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) और उसके संस्थापक अभिजीत दिपके को अमेरिकी दानदाताओं से धन मिलने का आरोप लगाया है। मिलबेन ने दावा किया कि इस धन का इस्तेमाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोध में गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। दिपके ने पलटवार करते हुए भारत के आंतरिक मामलों में विदेशी हस्तक्षेप पर सवाल उठाए। फिलहाल, विदेशी फंडिंग से जुड़े इन आरोपों की पुष्टि करने वाले सार्वजनिक वित्तीय साक्ष्य सामने नहीं आए हैं।
दिल्ली में प्रदर्शन, पुलिस कार्रवाई, मेट्रो प्रतिबंधों और एसआईआर से जुड़े मामलों पर अब अदालतों की सुनवाई और जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)