पुणे-मुंबई एक्सप्रेसवे मिसिंग लिंक पर भूस्खलन को लेकर ट्रोलिंग पर बोले नितिन गडकरी, कहा- ‘बिना गलती मुझे किया गया जिम्मेदार’
पुणे। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने पुणे-मुंबई एक्सप्रेसवे के ‘मिसिंग लिंक’ हिस्से पर हुए भूस्खलन के बाद सोशल मीडिया पर हुई आलोचना को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि घटना के लिए उन्हें बिना वजह ट्रोल किया गया, जबकि इस हिस्से का निर्माण केंद्र सरकार ने नहीं, बल्कि महाराष्ट्र सरकार के तहत महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम ने कराया था।
सिम्बायोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी की ओर से आयोजित ‘फेस्टिवल ऑफ थिंकर्स’ व्याख्यान श्रृंखला में बोलते हुए गडकरी ने कहा कि उन्होंने करीब 27 साल पहले पुणे-मुंबई एक्सप्रेसवे के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने दावा किया कि इतने वर्षों बाद भी एक्सप्रेसवे की मूल सड़क की गुणवत्ता अच्छी बनी हुई है और सड़क पर गड्ढों की समस्या नहीं है।
गडकरी ने कहा कि इतने लंबे समय तक सड़क की अच्छी स्थिति को लेकर उन्हें या परियोजना को पर्याप्त सराहना नहीं मिली, लेकिन जैसे ही मिसिंग लिंक हिस्से में समस्या आई, सोशल मीडिया पर उन्हें निशाना बनाया गया और इसके लिए जिम्मेदार ठहराया गया।
केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि मिसिंग लिंक का निर्माण महाराष्ट्र सरकार की एजेंसी एमएसआरडीसी द्वारा कराया गया था। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर गलत तरीके से जिम्मेदारी तय किए जाने के बावजूद वह मानते हैं कि ऐसे प्लेटफॉर्म इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की गुणवत्ता और अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
गडकरी ने बताया कि वह पुणे-मुंबई एक्सप्रेसवे के मूल निर्माण के समय ही मिसिंग लिंक तैयार करना चाहते थे, लेकिन उस समय वन विभाग से आवश्यक मंजूरी नहीं मिल सकी थी। बाद में इस परियोजना को आगे बढ़ाया गया।
करीब 6,600 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली इस परियोजना का उद्घाटन 1 मई को किया गया था। इसका उद्देश्य पुणे और मुंबई के बीच यात्रा का समय कम करना और यातायात को अधिक सुगम बनाना था।
जुलाई की शुरुआत में लगातार हुई भारी बारिश के दौरान मिसिंग लिंक के एक हिस्से में भूस्खलन हुआ था। इससे यातायात प्रभावित हुआ और परियोजना की निर्माण गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे। इसके बाद विपक्षी नेताओं ने भी महाराष्ट्र सरकार पर निशाना साधते हुए निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाए थे।
गडकरी के बयान के बाद एक बार फिर यह सवाल चर्चा में है कि किसी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना में समस्या आने पर जिम्मेदारी किस स्तर पर तय की जानी चाहिए और सोशल मीडिया पर आरोप लगाने से पहले परियोजना के निर्माण और प्रशासनिक नियंत्रण से जुड़ी वास्तविक जानकारी कितनी महत्वपूर्ण है।
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